


जमशेदपुर।
देश में बढ़ते मानसिक तनाव और आत्महत्या के मामलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अब 100 या उससे अधिक छात्रों वाले सभी स्कूलों और कॉलेजों में प्रशिक्षित काउंसलर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की नियुक्ति अनिवार्य होगी। यह कदम छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
काउंसलर और हेल्पलाइन जरूरी
नए निर्देशों के अनुसार, सभी शैक्षणिक संस्थानों को अपने परिसर में हेल्पलाइन नंबर प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित करना होगा, ताकि जरूरत पड़ने पर छात्र तुरंत सहायता प्राप्त कर सकें। वहीं छोटे संस्थानों को बाहरी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से जुड़ने का निर्देश दिया गया है, जिससे आपात स्थिति में छात्रों को समय पर सहायता मिल सके।
आत्महत्या के बढ़ते मामलों पर चिंता
यह फैसला देशभर में छात्रों के बीच बढ़ती आत्महत्या की घटनाओं और मानसिक दबाव को देखते हुए लिया गया है। कोर्ट ने संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे छात्रों को निरंतर मनोवैज्ञानिक सहयोग प्रदान करें और एक सुरक्षित व सहयोगी वातावरण तैयार करें।
संस्थानों के लिए नई गाइडलाइन
कोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में छात्र-परामर्शदाता अनुपात बनाए रखने पर जोर दिया गया है। इसके अलावा परीक्षा या शैक्षणिक बदलाव के समय विशेष मार्गदर्शन देने की बात कही गई है। साथ ही छात्रों को सार्वजनिक रूप से अपमानित करना, प्रदर्शन के आधार पर बैच विभाजन और अवास्तविक अपेक्षाएं रखने जैसी प्रथाओं को हतोत्साहित किया गया है।
‘जीवन’ केंद्र चलाएगा जागरूकता अभियान
जमशेदपुर स्थित जीवन आत्महत्या निवारण केंद्र ने इस फैसले का स्वागत किया है। संस्था ने कहा कि वह जल्द ही जागरूकता अभियान शुरू करेगी और स्कूलों व कॉलेजों को मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करेगी।
हेल्पलाइन और परामर्श सुविधा
‘जीवन’ केंद्र द्वारा 9297777499 और 9297777500 हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं, जिन पर फोन और व्हाट्सऐप के माध्यम से भावनात्मक सहयोग दिया जा रहा है। इसके अलावा बिष्टुपुर स्थित केंद्र में सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक आमने-सामने परामर्श सुविधा भी उपलब्ध है।
छात्रों के लिए सकारात्मक पहल
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इन दिशा-निर्देशों को तय समयसीमा में लागू करने का आदेश दिया है। यह कदम न केवल आत्महत्या की घटनाओं को रोकने में मदद करेगा, बल्कि छात्रों के समग्र विकास और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण के निर्माण में भी अहम भूमिका निभाएगा।



