


jamshedpur।
धर्म, संस्कृति और वैदिक परंपराओं के संरक्षण हेतु समर्पित धर्मरक्षिणी पौरोहित्य महासंघ के 13वें स्थापना दिवस समारोह को लेकर गुरुवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। यह बैठक 26 दिसंबर 2025, शुक्रवार को दोपहर 1 बजे वेद अध्ययन अनुशीलन केंद्र में महासंघ से जुड़े आचार्यों की उपस्थिति में संपन्न हुई। बैठक में स्थापना दिवस समारोह को भव्य एवं गरिमामय ढंग से आयोजित करने को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
बैठक की शुरुआत स्वस्तिवाचन एवं मंगल पाठ के साथ हुई, जिसके बाद आचार्यों ने संगठन की गतिविधियों, उद्देश्यों और आगामी कार्यक्रमों पर चर्चा की। सभी सदस्यों की सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि धर्मरक्षिणी पौरोहित्य महासंघ का 13वां स्थापना दिवस 17 जनवरी 2026 (शनिवार) को धूमधाम से मनाया जाएगा। समारोह को वैदिक परंपराओं के अनुरूप आयोजित करने तथा समाज में धर्म और संस्कारों के प्रति जागरूकता फैलाने पर विशेष बल दिया गया।
बैठक के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही घटनाओं पर भी चिंता व्यक्त की गई। विशेष रूप से बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार और हाल के दिनों में एक हिंदू युवक की निर्मम हत्या का उल्लेख किया गया। इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत युवक की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया।
महासंघ के अध्यक्ष पं. बिपीन कुमार झा एवं महासंघ सचिव उमेश कुमार तिवारी ने इस अवसर पर बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। दोनों पदाधिकारियों ने सरकार से इस विषय में ठोस कदम उठाने और पीड़ित हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग करने की बात कही।
बैठक में महासंघ से जुड़े कई वरिष्ठ एवं गणमान्य आचार्य उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से पं. दिलीप पाण्डेय, पं. मुन्ना पाण्डेय, पं. आनंद पाण्डेय, पं. मोहन शास्त्री, पं. एन. के. पाण्डेय, पं. राजकुमार मिश्र, पं. शिवशक्ति झा, पं. परशुराम पाण्डेय, पं. चंद्रकांत झा, पं. कुमुद झा, पं. हर्ष पाण्डेय सहित शहर के अनेक प्रतिष्ठित आचार्यगण बैठक में शामिल हुए।
बैठक के अंत में स्थापना दिवस समारोह को सफल बनाने के लिए सभी आचार्यों ने सामूहिक रूप से सहयोग करने और आयोजन को ऐतिहासिक बनाने का संकल्प लिया।



