


JAMSHEDPUR।
भारत के महान शायर मिर्ज़ा ग़ालिब के जन्मदिन के अवसर पर साहित्यिक संस्था ‘दबिस्तान-ए-जमशेदपुर” ने विगत संध्या ‘होटल दी सीनेट’ जमशेदपुर में एक शानदार मुशायरे का आयोजन किया जिसकी अध्यक्षता प्रो अहमद बद्र ने की। मुख्य अतिथि कर्नल तौकीर मुंतखब एवं अन्य अतिथि डॉ मोहम्मद रेयाज (प्राचार्य करीम सिटी कॉलेज), डॉ हसन इमाम मालिक अध्यक्ष उर्दू भवन) एवं रजी नौशाद थे। इस मुशायरे में बड़ी संख्या में शहर की महिलाएं एवं पुरुष श्रोता उपस्थित हुए और शेर-व-शायरी का भरपूर आनंद उठाया। इस मुशायरे में शहर के 17 चुनिंदा शायरों ने अपने कलाम पेश किए और श्रोताओं से खूब वाह वाही लूटी। कार्यक्रम का शुभारंभ हाफिज वालीउल्लाह कास्मी के द्वारा तिलावत-ए-कुरान से हुआ। एदारे के सरपरस्त शायर गौहर अजीज ने अतिथियों, शायरों तथा श्रोताओं का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि इस मुशायरे के आयोजन का उद्देश्य शहर में उर्दू भाषा का चलन और शायरी की कला को प्रोत्साहित करना है क्योंकि राष्ट्रीय सतह पर जमशेदपुर के उर्दू साहित्य को आज भी स्वीकार किया जाता है।
मुशायरे से पहले प्रो अहमद बद्र ने गालिब के व्यक्तित्व और उनकी शायरी पर वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि ग़ालिब का जीवन और उनकी शायरी दोनों पेचीदा है। जिन्हें समझने की आवश्यकता आज भी है। मुशायरे में कलाम सुनाने वाले शेयरों में सरफराज शाद, सफदर हारून, सैफ अली सैफ, हसरत निजामी, शोएब अख्तर, सकलैन मुश्ताक, फरहान खान फरहान, सफीउल्लाह सफी, वालीउल्लाह वली, सद्दाम गनी, मेहताब उर्फी, मोहम्मद फैयाज, रिजवान औरंगाबादी, गौहर अजीज, बद्रे आलम खलिश, अनवर अदीब तथा अहमद बद्र के नाम प्रमुख हैं। कार्यक्रम के बाद अतिथियों ने बारी-बारी से सभा को संबोधित किया और मुशायरे को कामयाब बताया। उन्होंने सभी शायरों विशेष कर नौजवान शायरों की खूब-खूब प्रशंसा की। मुशायरे का सुंदर संचालन शायर सद्दाम गनी ने किया और फरहान ने धन्यवाद ज्ञापन किया।



