
जमशेदपुर। तूरामडीह विस्थापित समिति की एक आवश्यक बैठक मंगलवार को तूरामडीह-लंदुप ग्राम सामुदायिक भवन में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता समिति के संयोजक रामसाईं सोरेन ने की। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा नेता एवं आदिवासी सुरक्षा परिषद, जमशेदपुर के अध्यक्ष राम सिंह मुंडा उपस्थित रहे। बैठक में विस्थापित परिवारों के मुद्दों, क्षेत्रीय विकास और हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों पर चर्चा की गई।
विस्थापितों के मुद्दों को राजनीति से दूर रखने की अपील
बैठक को संबोधित करते हुए राम सिंह मुंडा ने कहा कि क्षेत्र के विस्थापित एवं प्रभावित परिवारों की समस्याओं को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा द्वारा किए गए लोकतांत्रिक हस्तक्षेप और धरना कार्यक्रम को राजनीतिक रंग देना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक बयान और सार्वजनिक प्रतिक्रियाएं मूल जनहित के मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि अर्जुन मुंडा विस्थापित और प्रभावित परिवारों के आग्रह पर उनकी समस्याओं को सुनने और समाधान की दिशा में लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के लिए तूरामडीह स्थित धरना स्थल पहुंचे थे।
विस्थापितों की मांगों को बताया जनहित से जुड़ा मुद्दा
राम सिंह मुंडा ने बताया कि विस्थापित परिवारों द्वारा सौंपे गए मांग-पत्र में स्थानीय विस्थापितों को रोजगार में प्राथमिकता, समुचित पुनर्वास, आश्रितों को रोजगार, धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों का संरक्षण एवं पुनर्निर्माण, सड़क, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का विस्तार, बच्चों की शिक्षा तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहयोग, प्रदूषण नियंत्रण और स्थानीय हितों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि इन मांगों में ऐसा कौन-सा विषय है जिसे जनहित या क्षेत्रीय विकास के खिलाफ माना जा सकता है।
“ग्रामसभा और पेसा कानून के नाम पर ग्रामीणों को गुमराह किया जा रहा”
राम सिंह मुंडा ने आरोप लगाया कि कुछ लोग ग्रामसभा और पेसा कानून का भय दिखाकर स्थानीय ग्रामीणों को गुमराह करने और निजी स्वार्थ साधने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनहित के मुद्दों पर चर्चा तथ्यों, संवैधानिक प्रावधानों और समाधान की दिशा में होनी चाहिए, न कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के आधार पर।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ संगठनों द्वारा पारंपरिक माझी-परगना व्यवस्था का उपयोग राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है, जो समाज के हित में नहीं है।
लोकतांत्रिक संवाद और संवैधानिक अधिकारों पर दिया जोर
राम सिंह मुंडा ने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक और जनप्रतिनिधि को जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनने और संवैधानिक दायरे में रहकर जनहित के मुद्दे उठाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन संवाद और समाधान की प्रक्रिया हमेशा सर्वोपरि होनी चाहिए।
विस्थापितों की समस्याओं के समाधान की मांग
आदिवासी सुरक्षा परिषद ने यूसीआईएल प्रबंधन, जिला प्रशासन और संबंधित संस्थाओं से मांग की कि क्षेत्र में शांति, सौहार्द और लोकतांत्रिक वातावरण बनाए रखते हुए विस्थापित परिवारों की समस्याओं का समयबद्ध, पारदर्शी और न्यायसंगत समाधान सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में पूर्व मुखिया प्रकाश सांडिल, रामसाईं सोरेन, ईश्वर सोरेन, भाजपा नेता संजय सिंह मुंडा, भाजपा एसटी मोर्चा जिला अध्यक्ष रमेश बास्के, जुझार समद, गणेश सरदार, मंगल कराई, देवाय दिग्गी, पाथोर दिग्गी, पूचू दिग्गी, रिया कुंकल, सरिता कुंकल, बबलू करूआ, किशोर महतो सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला एवं पुरुष उपस्थित रहे।
