Ranchi. झारखंड हाइकोर्ट ने एक बांग्लादेशी महिला को निर्वासित नहीं किये जाने और 2020 से उसके हजारीबाग स्थित विदेशी नागरिक हिरासत केंद्र में रहने को लेकर सोमवार को केंद्र से जवाब तलब किया. न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ सामाजिक कार्यकर्ता अपूर्व विवेक की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी. विवेक ने महिला की रिहाई का मुद्दा उठाया है. विवेक ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र में रहने के दौरान महिला के साथ यौन उत्पीड़न किया गया.

बांग्लादेशी महिला को 2018 में जामताड़ा में बच्चे के अपहरण के मामले में गिरफ्तार किया गया था. जामताड़ा की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने महिला को दो साल कैद की सजा सुनाई थी और 2020 में उसे रिहा कर दिया गया था. हालांकि, रिहाई के बाद उसकी पहचान वैध दस्तावेजों के बिना बांग्लादेशी नागरिक के रूप में हुई और बाद में उसे हजारीबाग स्थित विदेशी नागरिक हिरासत केंद्र भेज दिया गया. विवेक ने आरोप लगाया कि केंद्र में सुरक्षा के लिए तैनात पुलिस कांस्टेबलों ने महिला का यौन उत्पीड़न किया और उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया.

वह जून 2025 में केंद्र से भाग गई थी, लेकिन पुलिस ने कुछ ही घंटों के भीतर उसे फिर गिरफ्तार कर लिया. सोमवार को सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से सवाल किया कि महिला को निर्वासित क्यों नहीं किया गया. अदालत ने कहा कि सजा पूरी करने के बाद उसे निर्वासित कर दिया जाना चाहिए था.
महाधिवक्ता रोहिताश्य राय ने अदालत को बताया कि विदेश मंत्रालय को कई बार पत्र भेजे गए हैं लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को इस मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 अक्टूबर की तारीख तय की. इस बीच, हजारीबाग जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने पीठ को एक सीलबंद रिपोर्ट सौंपी और बताया कि महिला के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप की पुष्टि हुई है.

