



Ranchi. झारखंड विधानसभा का मॉनसून सत्र बृहस्पतिवार को शुरू हुआ। इस दौरान भाजपा विधायकों ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में आंदोलन के समर्थन में विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन विपक्षी विधायकों ने विधानसभा परिसर में प्रदर्शन किया। पिछले 13 दिनों से जारी इस आंदोलन में अब छह प्रदर्शनकारी आमरण अनशन पर हैं। भाजपा के विधायकों ने सांकेतिक विरोध के तौर पर मास्क पहनकर सदन में हिस्सा लिया।
विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी समेत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायकों के मास्क पर एक संदेश छपा था जिसमें कथित गड़बड़ियों पर सरकार से जवाब की मांग की गई थी। भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के विधायकों ने विधानसभा परिसर में भी विरोध प्रदर्शन किया और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच की मांग की। विधायकों ने राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान भाजपा के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने आरोप लगाया कि सरकार झारखंड के युवाओं के भविष्य का ‘सौदा”कर रही है।
उन्होंने कहा, ”सरकार ने एक समिति गठित की है, लेकिन उसे यह समझना चाहिए कि उसकी सीआईडी और समिति पर किसी को भरोसा नहीं है। मामले की जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए। भाजपा के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार छात्रों द्वारा उठाए गए मुद्दे को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा, मैं उन छात्रों का धन्यवाद करना चाहता हूं, जिन्होंने सकारात्मक रुख अपनाया है। आज सार्थक बातचीत संभव है।”
विधानसभा घेराव के प्रस्तावित कार्यक्रम
छात्र संगठनों द्वारा सात और दस अगस्त को विधानसभा घेराव के प्रस्तावित कार्यक्रम को देखते हुए प्रशासन ने छह से 12 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह छह बजे से रात 10 बजे तक विधानसभा के 750 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा लागू कर दी है। सत्र के पहले दिन सदन की कार्यवाही कुछ देर के लिए चली और हाल में दिवंगत हुई प्रमुख हस्तियों को श्रद्धांजलि देने के बाद कार्यवाही शुक्रवार पूर्वाह्न 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी।
सदन को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने कहा कि मानसून सत्र के दौरान छह से 12 अगस्त तक पांच कार्य दिवस होंगे और 2026-27 वित्तीय वर्ष के लिए पहला अनुपूरक बजट भी पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा, मुझे पूरा भरोसा है कि सत्र की सभी बैठकें पूरी गंभीरता, अनुशासन और रचनात्मकता के साथ आयोजित की जाएंगी।” महतो ने कहा कि लोकतंत्र सिर्फ बहुमत का शासन नहीं है बल्कि यह संवाद, सहिष्णुता और भिन्न विचारों के प्रति आपसी सम्मान की संस्कृति भी है।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा, सत्ता पक्ष और विपक्ष लोकतांत्रिक व्यवस्था के समान रूप से महत्वपूर्ण अंग हैं। विचारों में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन जनहित हमेशा सर्वोपरि होना चाहिए।” महतो ने सदस्यों से सत्र को अनुशासित, गरिमापूर्ण, परिणाम-उन्मुख और जन-केंद्रित बनाने की अपील की ताकि यहां होने वाली चर्चाएं राज्य के लोकतांत्रिक मूल्यों और जनता के साथ संबंधों को और मजबूत कर सकें।
हाल में जिन नेताओं, कलाकारों, समाजसेवियों, साहित्यकारों और आम नागरिकों का निधन हुआ, उनकी याद में सदन के सदस्यों ने एक मिनट का मौन रखा। इनमें कांग्रेस के पूर्व मंत्री मन्नान मल्लिक, पूर्व विधायक माधव लाल सिंह, गायिका आशा भोसले, शायर बशीर बद्र, खिलाड़ी जसपाल राणा और संथाली लेखक रविलाल टुडू को श्रद्धांजलि दी गई।


