


Ranchi. भाकपा (माले) लिबरेशन की झारखंड इकाई ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर राज्यसभा चुनाव के दौरान हुई ‘क्रॉस-वोटिंग’ की जांच की मांग की, जिसके कारण कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की हार हुई थी। पार्टी के एक नेता ने यह जानकारी दी। पार्टी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ नेताओं और मंत्रियों का ऐसी ‘ताकतों’ के साथ जुड़ाव है, जो झारखंड के जल, जंगल और जमीन के संदर्भ में कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देते हैं।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी लेनिनवादी) लिबरेशन के प्रदेश सचिव मनोज भक्त ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘हमने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर राज्यसभा चुनाव के पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही, हमने उनसे उन कांग्रेस विधायकों का पता लगाने का आग्रह किया है जो (‘इंडिया’ गठबंधन के उम्मीदवार को हराने की) साजिश में शामिल थे। हमने उनके खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की है।’’
एक अधिकारी ने बताया कि ‘क्रॉस-वोटिंग’ के चलते राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवाणी ने बृहस्पतिवार को झारखंड में राज्यसभा चुनाव में जीत हासिल की और कांग्रेस के प्रणव झा को हराया। दूसरी सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम निर्वाचित हुए। भक्त ने कहा, ‘अपनी नाकामी की ज़िम्मेदारी लेने के बजाय, कांग्रेस अपने सहयोगी दलों राष्ट्रीय जनता दल और भाकपा (माले) लिबरेशन पर झूठे आरोप लगाकर जवाबदेही से बचने की कोशिश कर रही है।’ झारखंड के लिए कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय जनता दल और भाकपा (माले) लिबरेशन पर ‘विश्वासघात’ का आरोप लगाया।



