New Delhi. रिलायंस इंडस्ट्रीज की दूरसंचार एवं डिजिटल सेवा कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) को कुल 22.19 गुना अभिदान मिला। सार्वजनिक निर्गम और एंकर निवेशकों से कुल मांग 7.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक रही, जबकि आवेदन करने वालों की संख्या रिकॉर्ड 1.39 करोड़ पर पहुंच गई। शेयर बाजारों के आंकड़ों के मुताबिक, निवेशकों ने निर्गम में रखे गए 19.75 करोड़ शेयरों के मुकाबले 438.3 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां लगाईं। यह आंकड़ा शुक्रवार शाम सात बजे तक का है।

संस्थागत निवेशकों की ओर से सबसे मजबूत मांग रही। पात्र संस्थागत खरीदारों (क्यूआईबी) की श्रेणी में आरक्षित शेयरों के मुकाबले 70.55 गुना बोलियां मिलीं। गैर-संस्थागत निवेशकों की श्रेणी को 14 गुना और खुदरा निवेशकों की श्रेणी को 2.72 गुना अभिदान मिला। शेयरधारकों के लिए आरक्षित हिस्से को 7.60 गुना और कर्मचारियों के हिस्से को 2.93 गुना अभिदान मिला।

सार्वजनिक निर्गम में एंकर निवेशकों को आवंटित शेयरों को शामिल किए बगैर 4.9 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बोलियां मिलीं। खुदरा निवेशकों की ओर से 25,867 करोड़ रुपये से अधिक की मांग रही।
कुल मांग निवेशकों द्वारा खरीदे जाने के लिए मांगे गए शेयरों के मूल्य को दर्शाती है, न कि कंपनी द्वारा जुटाई जाने वाली रकम को।
बुधवार को खुले इस आईपीओ में आए 1.39 करोड़ आवेदनों की संख्या अक्टूबर, 2024 में वारी एनर्जीज के आईपीओ में दर्ज 97.34 करोड़ आवेदनों के पिछले भारतीय रिकॉर्ड को पार कर जाएगी। जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ पूरी तरह नए शेयरों का निर्गम है। कंपनी ने 1,065 से 1,119 रुपये प्रति शेयर के मूल्य दायरे में 27 करोड़ नए शेयर जारी किए हैं। ऊपरी मूल्य स्तर पर कंपनी करीब 30,213 करोड़ रुपये जुटाएगी और उसका मूल्यांकन लगभग 108 अरब डॉलर होगा।
रिलायंस इंडस्ट्रीज या कंपनी के अन्य मौजूदा शेयरधारक इस निर्गम में अपने शेयर नहीं बेच रहे हैं।
कंपनी ने आईपीओ खुलने के एक दिन पहले 19 अक्टूबर को 212 एंकर निवेशकों से करीब 8,110 करोड़ रुपये जुटाए थे। उन्हें 1,119 रुपये प्रति शेयर की दर से शेयर आवंटित किए गए थे। आईपीओ से जुटाई जाने वाली राशि में से 27,500 करोड़ रुपये तक का इस्तेमाल कंपनी अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी रिलायंस जियो इन्फोकॉम के कर्ज चुकाने के लिए करेगी। बाकी राशि का इस्तेमाल प्रौद्योगिकी और डिजिटल सेवाओं में निवेश सहित पूंजीगत खर्च तथा कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा।

