Mumbai. डिजिटल एवं दूरसंचार कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रबंध निदेशक आकाश अंबानी ने बृहस्पतिवार को कहा कि कंपनी 6जी प्रौद्योगिकी पर काम कर रही है और 2030 के दशक की शुरुआत में इसे वाणिज्यिक रूप से शुरू करने की स्थिति में होगी। जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा। मसौदा दस्तावेज के मुताबिक, निर्गम में 10 रुपये अंकित मूल्य वाले अधिकतम 27 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे। इसमें मौजूदा शेयरधारकों की ओर से बिक्री पेशकश (ओएफएस) शामिल नहीं होगी। प्रस्तावित निर्गम कंपनी की मौजूदा शेयर पूंजी का करीब तीन प्रतिशत है।

प्रति शेयर 1,065 से 1,119 रुपये के मूल्य दायरे के ऊपरी स्तर पर आईपीओ से करीब 30,213 करोड़ रुपये जुटाए जाने का अनुमान है। ऐसा होने पर यह देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। एंकर निवेशकों के लिए बोली 19 अक्टूबर को होगी। रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास जियो प्लेटफॉर्म्स की 66.43 प्रतिशत हिस्सेदारी है। अंबानी ने कंपनी के अगले सप्ताह आने वाले आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) से पहले संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि जियो 6जी नेटवर्क शुरू करने के लिए नए बुनियादी ढांचे के निर्माण के बजाय सॉफ्टवेयर अपडेट आधारित व्यवस्था पर विचार कर रही है। इससे अगली पीढ़ी की दूरसंचार सेवाएं शुरू करने के लिए बड़े निवेश की जरूरत कम हो सकती है।

अंबानी ने कहा, 6जी हमारी प्राथमिकताओं में शामिल है। इसका मतलब है कि हम नए बुनियादी ढांचे के निर्माण के बजाय सॉफ्टवेयर अपग्रेड के जरिये 6जी सेवाएं शुरू करने की दिशा में काम करेंगे। उन्होंने कहा कि 6जी प्रौद्योगिकी के मामले में कंपनी फिलहाल मानक तय होने से पहले के चरण में है। वर्ष 2029 तक इस प्रौद्योगिकी के मानक तय हो जाने की उम्मीद है। अंबानी ने कहा, 6जी प्रौद्योगिकी की वाणिज्यिक शुरुआत 2030 के दशक के शुरुआती वर्षों में होगी।
उन्होंने कहा कि जियो के 4जी और 5जी नेटवर्क से 53 करोड़ भारतीय जुड़े हुए हैं। कंपनी 6जी सेवाओं के जरिये भी ऐसी प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराने पर ध्यान देगी, जो आम लोगों के लिए सुलभ हो और उनके जीवन को बेहतर बनाए। अंबानी ने कहा कि जियो के 5जी नेटवर्क की संभावित क्षमता का फिलहाल करीब एक-तिहाई ही इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में कंपनी की तात्कालिक प्राथमिकता अधिक से अधिक ग्राहकों को 5जी नेटवर्क पर लाना है।
उन्होंने कहा कि जियो को वित्त वर्ष 2030-31 तक अगले पांच वर्षों में अपने ग्राहक आधार में 34 करोड़ की वृद्धि की उम्मीद है। इसमें करीब 10 करोड़ ग्राहक आबादी बढ़ने के कारण जुड़ेंगे, जबकि शेष 24 करोड़ ग्राहक कंपनी की बेहतर सेवाओं की वजह से उसके नेटवर्क से जुड़ सकते हैं।

