Mumbai. टाटा ट्रस्ट के तहत संचालित होने वाले दो ट्रस्ट ने बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के कार्यालय में हलफनामा दाखिल कर अपने कामकाज पर सवाल उठाने के मेहली मिस्त्री के अधिकार को चुनौती दी। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और बाई हीराबाई जमशेदजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टिट्यूशन ने कहा कि दिवंगत रतन टाटा के करीबी माने जाने वाले मिस्त्री का ट्रस्टी के रूप में कार्यकाल 28 अक्टूबर, 2025 को समाप्त हो गया था। ऐसी स्थिति में उन्हें न्यासों के संचालन और प्रशासन पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं है। मिस्त्री ने कथित तौर पर दोनों ट्रस्ट में प्रशासन संबंधी खामियों और हितों के टकराव का आरोप लगाते हुए चैरिटी कमिश्नर के समक्ष शिकायत की थी।

दोनों ट्रस्ट ने अलग-अलग हलफनामों में कहा कि मिस्त्री की नियुक्ति तीन साल के लिए थी और वह पूर्व ट्रस्टी होने के आधार पर उनके कामकाज को चुनौती नहीं दे सकते। उन्होंने आग्रह किया कि शिकायतों के गुण-दोष पर विचार करने या किसी जांच का आदेश देने से पहले उनकी आपत्तियों पर फैसला किया जाए। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) ने कहा कि वह, सर रतन टाटा ट्रस्ट और बाई हीराबाई अलग-अलग सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट हैं। इनके संचालन संबंधी दस्तावेज, न्यासी मंडल, संपत्तियां और खाते भी अलग हैं। इसलिए इन सभी मामलों की एक साथ सुनवाई नहीं होनी चाहिए।

इन हलफनामों पर जवाब दाखिल करने के लिए मिस्त्री को पांच नवंबर तक का समय दिया गया है। इस बीच, बाई हीराबाई ट्रस्ट ने विजय सिंह के इस साल ट्रस्टी पद से हटने के बाद उनकी जगह नोएल टाटा को मामले में रिपोर्टिंग ट्रस्टी नियुक्त करने के लिए आवेदन दिया है।
मिस्त्री ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि चैरिटी कमिश्नर के कार्यालय को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नोएल टाटा ट्रस्ट के नियमों के तहत ट्रस्टी बनने की पात्रता रखते हैं।
एक अन्य सुनवाई में सर रतन टाटा ट्रस्ट ने चैरिटी कमिश्नर के कार्यालय से कहा कि 15 मई के आदेश के कारण उसे बैठकें आयोजित करने पर रोक का सामना करना पड़ रहा है। दूरसंचार कंपनियों के लिए 4जी और 5जी नेटवर्क पर कॉल करने वाले का नाम दिखाना होगा अनिवार्य
नयी दिल्ली. दूरसंचार विभाग ने एक नवंबर से 4जी और 5जी मोबाइल नेटवर्क पर कॉल करने वालों का वास्तविक नाम दिखाना अनिवार्य कर दिया है। तकनीकी रूप से इसे सीएनएपी यानी कॉलकर्ता का नाम दिखाने की सेवा कहा जाता है। एक आधिकारिक परिपत्र में यह कहा गया है।
विभाग ने 13 अक्टूबर को जारी परिपत्र में कहा कि दूरसंचार कंपनियों ने 4जी और इससे आगे की पीढ़ी की तकनीकों पर सीएनएपी (कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन) सेवा शुरू करने के लिए परीक्षण किए हैं। परिपत्र में कहा गया, सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को एक नवंबर, 2026 से अपने सभी सेवा क्षेत्रों में दूरसंचार नेटवर्क पर कॉल करने वाले का नाम दिखाने की सेवा शुरू करने का निर्देश दिया जाता है।’’
ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने के लिए नेटवर्क में यह प्रौद्योगिकी शुरू की गई है। परिपत्र में कहा गया, ‘2जी और 3जी प्रौद्योगिकी पर आधारित वायरलेस नेटवर्क तथा सार्वजनिक स्विच्ड टेलीफोन नेटवर्क (सार्वजनिक टेलीफोन नेटवर्क) में कॉल करने वाले का नाम दिखाने की सेवा शुरू करने पर मामले की जांच के बाद अलग से विचार किया जाएगा। परिपत्र के अनुसार, आने वाली कॉल प्राप्त करने वाले व्यक्ति को सबसे पहले अपनी संपर्क सूची में रखा गया नाम दिखाई देगा। इसके बाद उस दूरसंचार कंपनी द्वारा पहचाना गया नाम दिखेगा, जिसके नेटवर्क पर कॉल करने वाला पंजीकृत है।

