


Ranchi. झारखंड के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने शुक्रवार को कहा कि झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जे-टीईटी) में क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल करने पर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन लेंगे। मंत्री ने यह बात पांच सदस्यीय मंत्रिस्तरीय समिति की दूसरी बैठक में भाग लेने के बाद कही। सरकार ने हाल ही में परीक्षा में क्षेत्रीय और स्थानीय भाषाओं को शामिल करने की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। किशोर ने कहा, जे-टीईटी परीक्षा में क्षेत्रीय भाषाओं, खासकर भोजपुरी, मगही और अंगिका को शामिल करने को लेकर समिति की दूसरी बैठक आज हुई। इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई और एक-दो दिन में रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी जाएगी, जिसके बाद वह अंतिम फैसला करेंगे।
उन्होंने कहा, हम चाहते हैं कि भोजपुरी, मगही और अंगिका के साथ-साथ जनजातीय भाषाओं को भी सम्मान मिले। इस बीच सूत्रों ने बताया कि समिति की बैठक में इस मुद्दे पर मतभेद के कारण आम सहमति नहीं बन सकी। समिति में शामिल झारखंड मुक्ति मोर्चा के दो मंत्रियों ने इस पर अलग राय जताई। समिति की पहली बैठक सोमवार को हुई थी। इससे पहले 28 अप्रैल को मंत्रिमंडल ने झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली-2026 को पश्च प्रभाव से मंजूरी दी थी। जे-टीईटी पात्रता परीक्षा नियमावली में विभिन्न जिलों के लिए निर्धारित भाषाओं से भोजपुरी, मगही और अंगिका को बाहर किए जाने को लेकर बढ़ते विरोध के बीच इस महीने की शुरुआत में पांच सदस्यीय मंत्रिस्तरीय समिति का गठन किया गया था।
समिति को नियमावली में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल करने या हटाने के संबंध में राज्य सरकार को सुझाव देने तथा भाषा संबंधी मामलों पर विचार-विमर्श और अध्ययन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। समिति के अन्य चार सदस्यों में श्रम, नियोजन एवं प्रशिक्षण मंत्री संजय प्रसाद यादव, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पाण्डेय सिंह, जल संसाधन मंत्री योगेन्द्र प्रसाद और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्या कुमार सोनू शामिल हैं। स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को समिति का नोडल विभाग बनाया गया है। विभाग को समिति की बैठकों का आयोजन करने और विस्तृत विचार-विमर्श के लिए आवश्यक दस्तावेज एवं अभिलेख उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई थी।




