


New Delhi. सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम विपणन कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे एलपीजी (रसोई गैस) का इतना भंडारण तैयार करें कि कम से कम 30 दिनों की मांग पूरी की जा सके। यह कदम पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने के बाद उठाया गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा कि सरकार रणनीतिक भंडारण को मजबूत करने पर काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक तेल विपणन कंपनियों को कम-से-कम 30 दिन की एलपीजी जरूरत को पूरा करने के लिए अतिरिक्त भंडारण की योजना बनाने को कहा गया है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) इस क्षेत्र में सक्रिय हैं।
फरवरी अंत में पश्चिम एशिया में संघर्ष छिड़ने के कारण भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर असर देखने को मिला है। इसकी वजह यह है कि भारत में कच्चे तेल का करीब 40 प्रतिशत, प्राकृतिक गैस का 65 प्रतिशत और एलपीजी का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। शर्मा ने कहा कि भारत कच्चे तेल के भंडारण की क्षमता बढ़ाने पर भी काम कर रहा है।
हालांकि उन्होंने इसके बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी। सरकार ने कहा कि फिलहाल देश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, कच्चे तेल एवं प्राकृतिक गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है और रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। एलपीजी उत्पादन भी लगभग 52,000 टन प्रतिदिन के रिकॉर्ड स्तर पर है।



