


New Delhi. राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) को औपचारिक रूप से मानद विश्वविद्यालय घोषित कर दिया गया है, जिससे उसे अपनी खुद की डिग्री देने का अधिकार मिल गया है। इस संबंध में जारी आधिकारिक अधिसूचना में कहा गया, ‘‘शिक्षा मंत्रालय ने, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की सलाह पर एनसीईआरटी और इसकी छह घटक इकाइयों को एक विशिष्ट श्रेणी के अंतर्गत मानद विश्वविद्यालय घोषित किया है। इन घटक इकाइयों में अजमेर, भोपाल, भुवनेश्वर, मैसुरु और शिलांग स्थित क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान तथा भोपाल स्थित पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान शामिल हैं।
स्कूली शिक्षा के लिए सर्वोच्च संस्था के रूप में, एनसीईआरटी विभिन्न गतिविधियाँ और कार्यक्रम संचालित करती है, जिनमें शैक्षिक अनुसंधान और नवाचार, पाठ्यक्रम विकास, तथा पाठ्य-सामग्री एवं शिक्षण-अध्ययन सामग्री का विकास शामिल है।
तीन साल पहले, केंद्र ने एनसीईआरटी को नयी शुरुआत संबंधी श्रेणी के तहत मानद विश्वविद्यालय का दर्जा देने को मंज़ूरी दी थी।
अधिसूचना में यह दर्जा प्रदान करने के संबंध में कुछ शर्तें सूचीबद्ध की गई हैं। ये शर्तें एनसीईआरटी को ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल होने से रोकती हैं जो ‘‘व्यावसायिक’’ और ‘‘लाभ कमाने वाली’’ प्रकृति की हों, तथा यह अनिवार्य करती हैं कि सभी शैक्षणिक पाठ्यक्रम या कार्यक्रम विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) एवं संबंधित वैधानिक निकायों या परिषदों द्वारा निर्धारित मानदंडों और मानकों के अनुरूप होने चाहिए।
इस अधिसूचना में एनसीईआरटी के लिए यह भी अनिवार्य किया गया है कि वह देश के भीतर या देश के बाहर स्थित अपने परिसरों में नए कार्यक्रम ‘‘केवल यूजीसी द्वारा समय-समय पर इस विषय पर जारी किए गए मानदंडों और दिशानिर्देशों के अनुसार ही’’ शुरू करे।
वर्तमान में, एनसीईआरटी के क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (आरईआई) द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले स्नातक और स्नातकोत्तर कार्यक्रम बरकतुल्ला विश्वविद्यालय (भोपाल), एमडीएस विश्वविद्यालय (अजमेर), मैसूर विश्वविद्यालय, उत्कल विश्वविद्यालय (भुवनेश्वर) और उत्तर-पूर्वी पर्वतीय विश्वविद्यालय (शिलांग) जैसे स्थानीय विश्वविद्यालयों से संबद्ध हैं।



