Ranchi.राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने झारखंड के बोकारो जिले में ईएसएल स्टील लिमिटेड में कथित तौर पर गैस की चपेट में आने से दो श्रमिकों की मौत के मामले में स्वतः संज्ञान लिया है। दोनों श्रमिकों की मौत 12 अक्टूबर को हुई थी। अधिकरण की ओर से शुक्रवार को जारी एक बयान के अनुसार, एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने चार नवंबर को इस मामले की सुनवाई की।

बयान में कहा गया कि वेदांता आयरन एंड स्टील लिमिटेड (वीआईएसएल) की अनुषंगी कंपनी ईएसएल स्टील के संयंत्र में दो श्रमिकों की मौत के संबंध में समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के आधार पर पीठ ने स्वतः संज्ञान लिया। बयान के अनुसार, ‘‘अधिकरण ने प्रथम दृष्टया पाया कि श्रमिकों की मौत कार्बन मोनोऑक्साइड गैस की चपेट में आने से हुई प्रतीत होती है। हालांकि, आदेश पारित किए जाने के समय पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार था।’’

अधिकरण ने कहा कि इस घटना से पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 और वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के संभावित उल्लंघन से जुड़े सवाल उठते हैं। बयान में कहा गया, ‘‘इस मामले में पर्यावरण मानकों के अनुपालन और वैधानिक प्रावधानों के क्रियान्वयन से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल शामिल हैं।’’
अधिकरण ने रांची स्थित झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, कोलकाता स्थित केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय, रांची स्थित पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय, और बोकारो के जिलाधिकारी को मामले में प्रतिवादी बनाया है। अधिकरण ने सभी प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले हलफनामे के माध्यम से अपना-अपना जवाब दाखिल करें।

