
New Delhi. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को विपक्ष पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह संसद को चुनावी हार के बाद हताशा निकालने का मंच बना रहा है. मोदी ने यह भी कहा कि यदि विपक्ष चाहे तो वह राजनीति में सकारात्मकता लाने के कुछ सुझाव देने को तैयार हैं. संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत से पहले संसद परिसर में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सत्र राजनीतिक रंगमंच न बने, बल्कि रचनात्मक और परिणामोन्मुखी बहस का माध्यम बने. उन्होंने कहा, “कुछ समय से हमारी संसद या तो चुनावों के लिए कथित तैयारी की जगह या फिर हार के बाद हताशा निकालने का माध्यम बन गई है.
बिहार चुनावों में विपक्ष की करारी हार का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष चुनावी नतीजों से विचलित है और हार को पचा नहीं पा रहा. प्रधानमंत्री ने कहा, हार अवरोध पैदा करने का आधार नहीं बननी चाहिए, और जीत भी अहंकार में नहीं बदलनी चाहिए. उन्होंने कहा कि बिहार में रिकॉर्ड मतदान लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है और विपक्ष को भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए चुनावी हार के बाद के अवसाद से बाहर आना चाहिए.

इधर, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर पलटवार करते हुए कहा कि शीतकालीन सत्र के पहले दिन प्रधानमंत्री ने संसद के समक्ष मुख्य मुद्दों की बात करने के बजाय फ़िर से ‘ड्रामेबाजी’ की है. उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को अब ध्यान भटकाने का नाटक ख़त्म कर जनता के असली मुद्दों पर संसद में चर्चा करनी चाहिए. खरगे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘शीतकालीन सत्र के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद के समक्ष मुख्य मुद्दों की बात करने के बजाय फ़िर से ‘ड्रामेबाज़ी’ की है असलियत यह है कि संसदीय मर्यादा और संसदीय प्रणाली को पिछले 11 साल से सरकार ने लगातार कुचला है, उसकी लंबी फेहरिस्त है.

उन्होंने कहा, पिछले मानसून सत्र में ही कम से कम 12 विधेयक जल्दबाजी में पारित कर दिए गए, कुछ 15 मिनट से भी कम समय में और कुछ बिना किसी चर्चा के. पूरे देश ने पहले भी देखा है किस तरह किसान विरोधी काले क़ानून, जीएसटी, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता जैसे विधेयक संसद में आनन-फानन में पारित कराए गए.



