
New Delhi. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मंगलवार को आईआरसीटीसी ‘घोटाला’ मामले में आरोप तय किए जाने को चुनौती देने वाली राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव की याचिकाओं का दिल्ली उच्च न्यायालय में विरोध किया। एजेंसी की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल डी पी सिंह ने कहा कि यह भ्रष्टाचार का मामला है, जिससे राजकोष को नुकसान हुआ। सीबीआई की प्राथमिकी के अनुसार, रेलमंत्री रहने के दौरान लालू यादव ने अपने करीबी सहयोगी और राज्यसभा में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सदस्य प्रेमचंद गुप्ता की पत्नी एवं सुजाता होटल्स की मालकिन सरला गुप्ता और आईआरसीटीसी के अधिकारियों के साथ मिलकर ‘‘स्वयं को तथा दूसरों को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचाने’’ के लिए आपराधिक साजिश रची थी।
जांच एजेंसी ने अपने आरोपपत्र में कहा है कि यह साजिश 2004 से 2014 के बीच रची गई थी। इसने आरोप लगाया है कि बीएनआर होटल्स आईआरसीटीसी के तत्कालीन प्रबंध निदेशक पी के गोयल द्वारा संचालित एक ‘‘धांधली भरी और हेराफेरी’’ वाली निविदा प्रक्रिया के माध्यम से सुजाता होटल्स को हस्तांतरित कर दिया गया था, और यादव परिवार ने बदले में पटना में कम कीमत पर भूखंड हासिल किए थे। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सिंह ने कहा, ‘‘इस मामले में भूमि हासिल करने की पूरी प्रक्रिया गंभीर संदेह पैदा करती है, और एक अभियोजक के रूप में, मैं इसे संदिग्ध कहूंगा।
भूमि इस प्रकार प्राप्त की गई। भूमि की खरीद श्रीमती यादव के मुख्यमंत्री रहते हुए हुई थी।’’ अदालत इस मामले की सुनवाई बुधवार को जारी रखेगी। निचली अदालत ने 13 अक्टूबर, 2025 को लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और 11 अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के अपराधों से संबंधित आरोप तय किए थे।
