


बेंगलुरु: भारत की स्वदेशी उच्च गति रेल प्रौद्योगिकी (High-Speed Rail Technology) के क्षेत्र में आज एक नया अध्याय जुड़ गया। माननीय केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने बीईएमएल लिमिटेड (BEML) के टिप्पसंद्रा परिसर, बेंगलुरु में विशेष ‘आदित्य’ कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया। यह कॉम्प्लेक्स विशेष रूप से हाई-स्पीड रेल निर्माण के लिए समर्पित है, जो देश की इंजीनियरिंग आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।
स्वदेशी इंजीनियरिंग की बड़ी जीत
उद्घाटन के अवसर पर रेल मंत्री ने कहा कि उच्च गति रेल की तकनीक बेहद जटिल और सूक्ष्म है। ‘आदित्य’ कॉम्प्लेक्स का विकास इस बात का प्रमाण है कि भारतीय इंजीनियर अब विश्व स्तरीय रोलिंग स्टॉक बनाने में सक्षम हैं। वर्तमान में यह कॉम्प्लेक्स बी-28 कोचों के विकास के लिए पूरी तरह तैयार है।
चेन्नई और बेंगलुरु बनेंगे ‘एकीकृत केंद्र’
रेल मंत्री ने हाई-स्पीड रेल की परिवर्तनकारी क्षमता पर चर्चा करते हुए एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने बताया कि:
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हाई-स्पीड ट्रेनों के आने से चेन्नई और बेंगलुरु के बीच यात्रा का समय घटकर मात्र 73 मिनट रह जाएगा।
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इससे दोनों महानगर एक-दूसरे के विस्तार के रूप में विकसित होंगे और एक बड़े आर्थिक केंद्र (Integrated Hub) के रूप में उभरेंगे।
बेंगलुरु-मुम्बई और तटीय कर्नाटक के लिए बड़ी सौगात
रेल मंत्री ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को लेकर कई महत्वपूर्ण अपडेट साझा किए:
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बेंगलुरु-मुम्बई: दो नई सेवाएं शुरू होंगी। हुबली के रास्ते एलएचबी (LHB) कोचों वाली नई मेल/एक्सप्रेस और जल्द ही वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस का संचालन शुरू होगा।
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बेंगलुरु-मंगलुरु: बहुत जल्द वंदे भारत सेवा शुरू की जाएगी। इस सेवा के माध्यम से मडगांव और अन्य तटीय शहरों को भी जोड़ा जाएगा।
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तकनीकी समाधान: हासन–मंगलुरु खंड का विद्युतीकरण पूर्ण हो चुका है। तीव्र ढलानों पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऑटोमेटेड इमरजेंसी ब्रेकिंग (AEB) प्रणाली को भी शामिल कर लिया गया है।
‘विकसित भारत’ के लिए इंजीनियरों की सराहना
अपने दौरे के समापन पर श्री वैष्णव ने टिप्पसंद्रा संयंत्र के इंजीनियरों की पीठ थपथपाई। उन्होंने कहा कि अगली पीढ़ी के रोलिंग स्टॉक पर किया जा रहा यह कार्य ‘विकसित भारत’ के विजन का आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय स्थिरता को भी प्राथमिकता दे रही है।



