


सरायकेला-खरसावा।
स्थानीय किसानों को उनकी कड़ी मेहनत का उचित मूल्य दिलाने और उपभोक्ताओं तक ताजे व गुणवत्तापूर्ण फल पहुंचाने के उद्देश्य से सरायकेला जिला प्रशासन ने एक बेहद सराहनीय पहल की है। स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की इस मुहिम से बिचौलियों की भूमिका खत्म हो रही है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नया बल मिल रहा है।
बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत बिक्री स्टॉल का शुभारंभ
मनरेगा के अंतर्गत संचालित बिरसा हरित ग्राम योजना से जुड़े किसानों के लिए एक नया सवेरा हुआ है। किसानों द्वारा उत्पादित आमों की प्रत्यक्ष बिक्री (Direct Selling) के लिए समाहरणालय परिसर में एक विशेष बिक्री स्टॉल का शुभारंभ किया गया है। उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने फीता काटकर इस स्टॉल का उद्घाटन किया और किसानों का उत्साह बढ़ाया।
किसानों को बाजार से जोड़ना समय की सबसे बड़ी मांग
इस अवसर पर उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि आज के दौर में किसानों को सीधे बाजार से जोड़ना सबसे बड़ी आवश्यकता है। केवल उत्पादन बढ़ाना ही काफी नहीं है; जब तक विपणन (मार्केटिंग) व्यवस्था मजबूत नहीं होगी, तब तक किसानों की आर्थिक स्थिति में वास्तविक सुधार नहीं आ सकता। यह प्रत्यक्ष बिक्री प्रणाली किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिला रही है, वहीं उपभोक्ताओं को भी केमिकल मुक्त और ताजे फल उचित कीमत पर मिल रहे हैं।
जिले भर में 8 स्थानों पर सजे आम के स्टॉल
सरायकेला जिले में वर्तमान में आठ अलग-अलग स्थानों पर आम बिक्री के स्टॉल संचालित किए जा रहे हैं। इन स्टॉलों पर स्थानीय बागानों में जैविक तरीके से उगाए गए विभिन्न किस्मों के स्वादिष्ट आम उपलब्ध हैं। इससे उपभोक्ताओं को ताजे फल मिल रहे हैं और किसानों को अपना उत्पाद बेचने के लिए दर-दर भटकने की परेशानी से बड़ी राहत मिली है।
प्रशासन द्वारा अधिकारियों को यह सख्त निर्देश दिया गया है कि सभी बिक्री केंद्रों पर गुणवत्ता, स्वच्छता और पारदर्शी मूल्य निर्धारण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, आमों के प्रचार-प्रसार के लिए विशेष अभियान चलाने को भी कहा गया है ताकि अधिक से अधिक किसान इस योजना का लाभ उठा सकें।
1000 किलो आम्रपाली आम का पहला बड़ा ऑर्डर
प्रशासन की इस पहल को उस समय और बड़ी कामयाबी मिली, जब सरायकेला आजीविका महिला प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड को ‘अपना मार्ट’ (Apna Mart) के माध्यम से 1000 किलोग्राम आम्रपाली आम की आपूर्ति का पहला व्यावसायिक ऑर्डर प्राप्त हुआ।
किसानों को इस बड़े ऑर्डर के लिए 60 रुपये प्रति किलोग्राम की दर तय की गई है। इसे स्थानीय किसानों के लिए एक संगठित बाजार की दिशा में एक बहुत ही महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि स्थानीय कृषि उत्पादों के लिए इसी प्रकार निरंतर बाजार उपलब्ध कराया जाता रहा, तो सरायकेला जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था जल्द ही अत्यधिक मजबूत और पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सकेगी।




