



Ranchi. आदिवासी नेता जयपाल सिंह मुंडा के बेटे जयंत जयपाल सिंह रांची में अपने पिता के नाम पर बने जयपाल सिंह स्टेडियम में जारी छात्रों के प्रदर्शन वाले स्थल पर पहुंचे और झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों को अपना समर्थन दिया। जयपाल सिंह मुंडा 20वीं सदी के सबसे प्रभावशाली आदिवासी नेताओं में से एक थे। उन्हें उनके समर्थकों के बीच ‘मारंग गोमके’ के नाम से जाना जाता है।
उन्होंने उस भारतीय हॉकी टीम की कप्तानी की थी, जिसने 1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता था। वह बीकानेर रियासत के प्रशासन का हिस्सा थे और वहां राजस्व आयुक्त के तौर पर सेवा दी थी।
जयंत जयपाल सिंह ने छात्रों को सलाह दी कि वे बुरे तत्वों, उपद्रवियों और बाहरी लोगों को आंदोलन में शामिल न होने दें। उन्होंने उनसे अपना संघर्ष जारी रखने का भी आग्रह किया ताकि आगामी चार-पांच वर्षों में परीक्षाएं निष्पक्ष रूप से आयोजित हों और यह सुनिश्चित हो सके कि हर छात्र को इसका लाभ मिले। स्टेडियम के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि पहले यहां एक तालाब हुआ करता था, जिसे स्कूल के बच्चों ने श्रमदान के जरिए खेल का मैदान बना दिया।
जयंत जयपाल सिंह ने कहा, यह मैदान मारंग गोमके जयपाल सिंह का नहीं है, बल्कि यह छात्रों और युवाओं का है। वे इसका जैसा भी इस्तेमाल करें, ठीक है, क्योंकि वे इसका इस्तेमाल विध्वंसक काम के बजाय रचनात्मक कार्यों के लिए कर रहे हैं। उन्होंने कहा, इसलिए, मैं उन छात्रों का पूरा समर्थन करता हूं जो परीक्षाएं निष्पक्ष और सही तरीके से आयोजित कराने के अपने जायज हक के लिए लड़ रहे हैं। ये छात्र भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद से मुक्त एक नये झारखंड के लिए आवाज उठा रहे हैं।

