


Ranchi/Jamshedpur. एलपीजी की कथित कमी की खबरों के बीच झारखंड समेत देशभर में लोग पेट्रोल पंपों और एलपीजी वितरण केंद्रों के बाहर लंबी कतारों में खड़े नजर आए, जिससे आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ रेस्तरां, स्कूलों और खानपान सेवाओं का कामकाज भी प्रभावित होने लगा है। हालांकि सरकार ने संसद में कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बावजूद पेट्रोल, डीजल और केरोसिन की कोई कमी नहीं है और यह अफवाहें फैलाने का समय नहीं है। काफी हद तक वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर पर निर्भर भोजनालयों और त्वरित सेवा रेस्तरां श्रृंखला में डर है कि आपूर्ति में पाबंदियां लगने से उनका कामकाज बाधित हो सकता है और लागत बढ़ सकती है।
होटलों ने कई मीनू किये बंद
कुछ भोजनालयों को अपना कामकाज सीमित करना पड़ा है। छोटे और मध्यम रेस्तरां बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। प्रतिष्ठित भोजनालयों को घटते गैस भंडार को बचाने के लिए डोसा और ‘फ्राइड राइस’ जैसे ज्यादा गैस खपत वाले व्यंजन परोसना बंद करना पड़ा है।
मध्याह्न भोजन योजना पर भी असर
रसोई गैस सिलेंडर की कथित कमी का असर राज्य के कई स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना पर भी पड़ने लगा है। कुछ स्थानों पर लकड़ी जैसे वैकल्पिक ईंधन का सहारा लिया जा रहा है या छात्रों को सीमित खाद्य पदार्थ परोसे जा रहे हैं। सरकार ने अफवाहों, गलत सूचनाओं और भ्रामक खबरों पर नजर रखने के लिए एक मीडिया निगरानी समिति भी गठित की है। ईंधन की कमी के डर से लोग घबराकर खरीदारी कर रहे हैं और गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी के आरोप लग रहे हैं।
फूड स्टॉल और ठेला लगाने वाले बंद कर रहे कारोबार
हाल के दिनों में देश के कई हिस्सों में कमर्शियल गैस की कमी की खबरें सामने आ रही हैं. इसका असर अब जमशेदपुर में भी देखने को मिल रहा है. यहां छोटे-छोटे फूड स्टॉल और ठेला लगाने वाले व्यापारी गैस की कमी से काफी परेशान हैं. उनका कहना है कि घरेलू गैस तो किसी तरह मिल जा रही है, लेकिन कमर्शियल गैस सिलेंडर मिलना बेहद मुश्किल हो गया है.
जुगसलाई में दो गैस एजेंसी इंडियन एवं एचपी के डीलर है। लेकिन दोनों एजेंसी के उपभोक्ताओं के घर नंबर लगाने के छह दिन बाद भी गैस घर नहीं पहुंचा। इससे लोग डीलर के कार्यालय और गोदाम का चक्कर लगा रहे हैं क्योंकि ऑटो से क्षेत्र में दोनों एजेंसियों की गैस सप्लाई बंद है। फूड स्टॉल चलाने वाले बताते हैं कि उन्हें हर पांच दिन में गैस सिलेंडर बदलना पड़ता है. लेकिन अभी हालत ऐसी हो गई है कि सिलेंडर मिल ही नहीं रहा. उनका कहना है कि कुछ दिन पहले तक 1500 से 1600 रुपये देकर ब्लैक में सिलेंडर मिल जाता था, लेकिन अब वह भी उपलब्ध नहीं है. ऐसे में दुकान चलाना बहुत मुश्किल हो गया है.



