


New York.अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर जो बाइडन प्रशासन के मतदान प्रतिशत (वोटर टर्नआउट) बढ़ाने के लिए भारत को 2.1 करोड़ डॉलर आवंटित करने के फैसले पर सवाल उठाया है. ट्रंप ने बृहस्पतिवार को मियामी में एफआईआई प्राथमिकता शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए ये टिप्पणियां कीं. उन्होंने पहले भी इसी तरह की चिंताएं जताई थीं और इस तरह की वित्तीय सहायता की आवश्यकता पर सवाल उठाया था.
उन्होंने बुधवार को ‘मतदान प्रतिशत’ बढ़ाने के लिए भारत को 2.1 करोड़ डॉलर प्रदान करने के उद्देश्य पर सवाल उठाया था. उनकी टिप्पणी एलन मस्क के नेतृत्व वाले सरकारी दक्षता विभाग (डोज) द्वारा यह खुलासा किए जाने के बाद आई है कि यूएसएड ने भारत में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए निर्वाचन आयोग को 2.1 करोड़ डॉलर का योगदान दिया है. एफआईआई शिखर सम्मेलन में, ट्रंप ने दर्शकों को कुछ उदाहरण दिए कि राष्ट्रपति बनने से पहले उनका पैसा कहां जा रहा था.
उन्होंने कहा, ‘…और भारत में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए 2.1 करोड़ डॉलर. हमें भारत में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए 2.1 करोड़ डॉलर खर्च करने की जरूरत क्यों है? वाह, मुझे लगता है कि वे (बाइडन प्रशासन) किसी और को निर्वाचित कराने की कोशिश कर रहे थे. हमें भारत सरकार को बताना होगा. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ‘भारत में चुनावों के लिए 2.1 करोड़ डॉलर और बांग्लादेश में राजनीतिक परिदृश्य को मजबूत करने के लिए 2.9 करोड़ डॉलर…एशिया अच्छा कर रहा है, हमें उन्हें पैसे देने की जरूरत नहीं है.’
उन्होंने कहा कि ये तो सिर्फ कुछ फंडिंग हैं, सूची बहुत लंबी है. गत 16 फरवरी को, डोज ने उन मदों को सूचीबद्ध किया जिन पर ‘अमेरिकी करदाताओं के डॉलर खर्च किए जाने वाले थे’ और सूची में ‘भारत में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए 2.1 करोड़ डॉलर’’ शामिल थे. डोज ने इन सभी मदों पर खर्च को रद्द कर दिया है.
शुक्रवार को भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन की ओर से भारत में चुनावी फंडिंग के बारे में दी गई जानकारी से देश के आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप को लेकर गंभीर चिंता पैदा हुई है. इससे पहले बीजेपी ने इस कथित फंडिंग को भारत में विदेशी हस्तक्षेप करार दिया था और इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा. हालांकि कांग्रेस ने भारत को पैसे मिलने के डोनाल्ड ट्रंप के दावे को ‘बकवास’ करार दिया था.



