


14 जून विश्व रक्तदाता दिवस के रुप में मनाया जाता है। वर्ष 2005 में विश्व स्वास्थ्य संगठन तथा इन्टरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस ने महान वैज्ञानिक, ABO ब्लड ग्रुपिंग सिस्टम के जनक नोबेल पुरस्कार विजेता कार्ल लैण्ड स्टैनर के जन्मदिन 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस के रूप में रक्तदाताओं के सम्मान में मनाने का निर्णय लिया। यह दिवस उन लाखों रक्तदाताओं के सम्मान में मनाया जाता है जो नियमित रक्तदान करते हैं और उनके रक्तदान से किसी को जीवनदान मिलता है और यह दिवस नये युवाओं को रक्तदान अभियान से जोड़ने का भी है। एक व्यक्ति का रक्तदान दूसरे व्यक्ति को नया जीवन देने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। रेड क्रॉस पूर्वी सिंहभूम तथा जमशेदपुर के लिए यह गर्व की बात है कि इस शहर के रक्तदाता पूरे भारत वर्ष में सबसे जागरुक रक्तदाता माने जाते हैं। इस शहर में अब रक्त के अभाव में किसी की मृत्यू नहीं होती, इसका श्रेय इस शहर के रक्तदाताओं को जाता है। रेड क्रॉस, पूर्वी सिंहभूम तथा जमशेदपुर ब्लड सेन्टर ने नियमित स्वैच्छिक रक्तदाताओं में जागरुकता पैदा करने तथा जरुरतमंदों को सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराने का सफल प्रयास किया है। जमशेदपुर के रक्तदाताओं ने कई संकटकालीन स्थितियों में रक्तदान के प्रति जो भावनात्मक सम्मान दिखाया है वह एक उदाहरण है। गर्मी के मौसम में जब रक्त की जरूरत बढ़ जाती है और रक्तदान शिविर कम होने लगते हैं ऐसे समय पूरी गर्मी में रेड क्रॉस के आह्वान पर लगातार रक्तदान शिविरों के आयोजन और रक्तदाताओं के मानवता की प्रति संकल्प के कारणों सैकड़ों लोगों के जीवन को कठिन संकट में भी बचा पाने में यह शहर सक्षम हो पाता है। हर जरूरतमन्द को कठिन परिस्थिति में भी रक्त उपलब्ध हो पाता है, यह जमशेदपुर शहर के रक्तदाताओं का एक भावनात्मक जुनून भी है और संकल्प भी, जो इस शहर के प्रत्येक रक्तदाता ने लिया कि गर्मी हो या सर्दी हो या कोरोना का डर, जीवन की लड़ाई में हर रक्तदाता जरूरतमंदों की जीवनरक्षा के लिए लिए रक्तदान करेंगे और शहर में रक्त का अभाव नहीं होने देंगे।
इतनी जागरुकता के बीच यह भी सच है कि आज भी कई परिवार और उनके युवा सदस्यों के लिए रक्तदान कोई विषय ही नहीं है, लेकिन जरूरत होने पर सोशल मीडिया से लेकर व्हाटसएप, ट्वीटर और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर रक्त की कमी का एक कृत्रिम आभासी दुनिया तुरंत ही तैयार कर देते हैं और काल्पनिक, आभासी और सही इन तीनों ही स्थितियों में वे ही कारगर होते हैं जो आगे बढ़ते हैं और जरूरत पड़ने पर अपने परिवार, समाज व देश के लिए और मानवता को नया जीवन देने के लिए आशा बनकर रक्तदान करते हैँ। इस अभियान को वे परिवार एक नयी उर्जा से भरते हैं जब एक ही रक्तदान शिविर में माता-पिता के साथ उनके युवा बच्चे-बच्चियां रक्तदान कर बताते हैं कि रक्तदान उनके परिवार की परम्परा है। कई रक्तदान शिविरों में माता-पिता अपने बच्चों को नियमित तौर पर रक्तदान शिविरों में लाकर स्वयं रक्तदान करते हैं ताकि युवा होने पर वे बच्चे स्वयं ही रक्तदान को प्रेरित हो सके। आज ऐसे परिवार और युवक युवतियों की हर जगह आवश्यकता है। आज का दिन एक नयी पौध को रक्तदान अभियान से जोड़ने का भी है ताकि वे पीढ़ी जिन्होने लगातार रक्तदान कर लोगों को नया जीवन देने का आजीवन व अपने सामर्थ्य तक प्रयास किया वे अपने बाद इस अभियान को उसी तरह देखें, जिसमें हर समय लाखों लोगों को पुनः पुनः जीवन की आशा देने की उम्मीद हो।
रेड क्रॉस सोसाईटी, पूर्वी सिंहभूम पूरे कृतज्ञता से मानव जीवन की रक्षा के लिए रक्तदान करने वाले प्रत्येक रक्तदाता का सम्मान करती है। इस शहर के लिए गर्व की बात यह भी है कि शहर जल्द ही रक्तदान का शतक मारने वाले रक्तदाताओं की गिनती भी शतक में ही करेगा। वर्तमान में ये विज्ञान का वरदान ही है, जिसने रक्तदान को एक ओर जहां जरूरतमंदों के लिए जीवनदान साबित किया वहीं रक्तदाता के स्वास्थय के लिए भी हितकर बताया, एक रक्तदाता रक्तदान के समय अपने जरूरी स्वास्थ्य जांच जिसमें होमोग्लोबि, रक्तचाप और चिकित्सक से जांच को आसानी से निशुल्क करवा पाते हैं, वहीं ब्लड बैग के साथ गये ब्लड सैंपल के माध्यम से सही ब्लड ग्रुप यानी एबीओ एंटीजन एवं आरएच ग्रुप सिस्टम के साथ ही रिवर्स ग्रुपिंग यानि एंटीबॉडी ग्रुप सिस्टम के जोड़ से सटीक ब्लड ग्रुप जानते हैं, साथ ही वे बीमारियां जो एक मनुष्य से दूसरे मनुष्य में रक्त के माध्यम से जा सकती हैं, उन बीमारियों की प्रत्येक रक्तदान पर जांच होती है, और इनमें से अधिकांश तो ऐसी है कि अगर कोई उस रोग की जांच न करवायें तो यह तबतक पता नहीं चलती, जब तक कि यह पूरे रूप में शरीर के सम्बन्धित तंत्र (सिस्टम) को प्रभावित न कर दे, यानि जानलेवा होने तक व्यक्ति को जानकारी नहीं होने देती, लेकिन रक्तदान करने पर यह जानकारी समय से प्राप्त हो जाती है और व्यक्ति आसानी से इसकी चिकित्सा में जाकर ठीक तक हो सकते हैं। आज एक रक्तदाता के रक्त से चार लोगों की जीवन रक्षा हो सकती है। ये संभव हुआ रक्त के कम्पोनेंट के विभाजन से, जिससे जिस तरह के रोगी को रक्त के जिस भाग की आवश्यकता हो, उसे पुर्ण रक्त न देकर उसके जरूरत का पृथक रक्त भाग दिया जाता है। आज रक्त को चार भागों में विभाजित किया जाता है जिसके तहत पैकशेल (रेड ब्लड शेल), फ्रेश फ्रोजेन प्लाज्मा, प्लेटलेट कन्सन्ट्रेट, क्रायोप्रीसिपिटेट या फैक्टर viii आते हैं।
14 जून ब्लड ग्रुपिंग सिस्टम ए, बी, ओ के महान आविष्कारक नोबल पुरस्कार विजेता कार्ल लेण्डस्टेनर के जन्मदिन को विश्व रक्तदाता दिवस के रूप में मनाकर पूरे विश्व में रक्तदान अभियान के प्रति समर्पित अन्तर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस सोसाईटी तथा रेड क्रिसेन्ट सोसाईटी, विश्व स्वास्थ्य संगठन, इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ ब्लड डोनर्स आर्गेनाइजेशन्स, इंटरनेशनल सोसाईटी ऑफ ब्लड ट्रांस्फ्यूजन तथा रेड क्रॉस की विभिन्न राष्ट्रीय एवं स्थानीय राज्य व जिला शाखाएं पूरे विश्व में रक्तदाताओं के सम्मान दिवस के रूप में मनाती है। पिछले पांच वर्षों में केन्द्र सरकार ने स्वैच्छिक रक्तदान के साथ साथ पूरे देश में ब्लड बैंकों के बेहतर कामकाज और जरूरतमंदों को स्वस्थ रक्त की आपूर्ति हेतु बेहतरीन पहल किये हैं, जिसमें इ-रक्तकोष एक महत्वपूर्ण प्लेटफार्म के रूप में सामने आया है, जिसमें देश के अधिकांश ब्लड बैंक जो ब्लड बैंक नार्म्स का सही तरीके से पालन करते हैं वे इससे जुड़कर रक्तदाता और जरूरतमंदों को पारदर्शिता के साथ रक्त की उपलब्धता के विषय में सूचित कर रहे हैँ। 14 जून विश्व रक्तदाता दिवस एक ऐसा अवसर प्रदान करता है जिस दिन हम रक्तदान कर दूसरों को जीवन का उपहार देनेवाले महान लोगों का सम्मान कर उनके प्रति आभार प्रकट करते हैं। दुनिया के हर कोने में रक्त की कमी का शिकार एनीमिया, थैलेसिमिया से ग्रस्त बच्चे, सिकेलसेल एनिमिया, हीमोफीलिया, मलेरिया, डेंगू, मैलन्युट्रिशन, सड़क दुर्घटनाओं के शिकार, गर्भवती महिलायें को रक्त के अभाव को दूर करने व जीवित रहने के लिए रक्त की आवश्यकता पड़ती है। आज भी यह कड़वी सच्चाई है कि कई स्थानों पर जहां जागरुकता का अभाव है वहां समय पर रक्त नहीं मिल पाने के कारण रक्त के अभाव में अनेकों लोगों की मौत हो जाती है जो मानवता के लिए अभिशाप है। ऐसी मौतों पर रक्तदाताओं के सहयोग से ही काबू पाया जा सकता है। दुनिया में हर कोने में ऐसे लाखों लाख रक्तदाताओं की आवश्यकता है जो अपने रक्त से दूसरों का जीवन बचा सकें। इसके लिए आवश्यक है कि अधिक से अधिक लोग खास कर 18 वर्ष के ऊपर के छात्र और नौजवान रक्तदान के प्रति समर्पित हों। रक्तदाता जहां अपने रक्त से दूसरों के जीवन की रक्षा करते हैं वहीं रक्तदान से वे स्वयं भी स्वस्थ एवं प्रसन्न रहते हैं।
दूसरों के जीवन रक्षा की एक अजीब सी अनुभूति हर रक्तदाता के दिल में होती है। उसका रक्त किसे दिया जाएगा और किसकी जान बचेगी यह जाने बिना निःस्वार्थ भाव से रक्तदान करना उसी अनुभूति का परिणाम होता है। भारतीय रेड क्रास सोसाईटी, पूर्वी सिंहभूम नगर एवं जिले के उन सभी रक्तदाताओं के प्रति हार्दिक सम्मान प्रकट करती है, जो रेड क्रास के रक्तदान शिविरों के साथ साथ विभिन्न संगठनों के माध्यम से रक्तदान कर अमूल्य मानव जीवन की रक्षा करते हैं। आज जरूरत इस बात की है कि हम स्वयं तो रक्तदान करें ही, औरों को भी रक्तदान के लिए प्रेरित करें, प्रोत्साहित करें। आईये मानवता की इस स्नेह भरी बूंद से उन जीवनों को सिंचित करें जो इसके अभाव से नष्ट हो जायेंगे।
श्याम कुमार प्रसाद
उप सचिव
इस वर्ष जमशेदपुर में रक्तदान के आंकड़े
जमशेदपुर ब्लड सेन्टर जो कि जमशेदपुर का मुख्य ब्लड सेन्टर है और इससे न सिर्फ जमशेदपुर पूर्वी सिंहभूम जिला बल्कि सरायकेला खरसवां और पश्चिमी सिंहभूम की रक्त जरूरतों को 90 प्रतिशत तक पूरा किया जाता है। इसके साथ ही सदर अस्पताल, परसुडीह, एमजीएम ब्लड बैंक मानगो तथा ब्रह्मानन्द ब्लड सेन्टर, तामोलिया, सरायकेला-खरसवां के माध्यम से लगभग 10 प्रतिशत रक्त की आपूर्ति होती है। हाल ही में तथा नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पीटल गम्हरिया में भी ब्लड सेन्टर की शुरुआत हुई है।
वर्ष 2025-26 में जमशेदपुर ब्लड सेन्टर द्वारा रक्तदान शिविरों के माध्यम से एवं इन हाउस जमशेदपुर ब्लड सेन्टर में हुए रक्तदान से कुल 57528 यूनिट ब्लड कलेक्शन हुए, जिसमें से 506 रक्तदान शिविरों के माध्यम से 45302 युनिट रक्त प्राप्त हुए, जमशेदपुर में रक्तदान, विशेषकर स्वैच्छिक रक्तदान के मामले में उत्कृष्ट शहरों में एक है यहां रिप्लेसमेंट डोनेशन राष्ट्रीय अनुपात 30 प्रतिशत से बहुत कम यानि लगभग 7-8 प्रतिशत है, जबकि बड़े और जागरुक शहरों में यह 20-25 प्रतिशत तक है। इस वर्ष समय पर समान ब्लड ग्रुप के अभाव में परिजनों द्वारा 3855 यूनिट रिप्लेसमेंट डोनेशन किया गया। महिलाओं की भागीदारी अमुमन हमेशा की तरह 2-3 प्रतिशत के बीच रही, जिसके लिए नये प्रयास किये जाने की आवश्यकता है।
आईये हम अपने शहर को रक्तदान के क्षेत्र में 100 प्रतिशत मजबूत बनायें, पूरे शहर की आबादी के अनुरूप इस शहर में 6 लाख ऐसी आबादी है, जिन्होने उम्र, स्वस्थ व समर्थ रहने के बाद भी अभी तक रक्तदान नहीं किया है, उनके अन्दर जो डर और भ्रान्तियां रक्तदान के प्रति है, उसे दूर करने की आवश्यकता है, हमें 6 लाख लोग नहीं चाहिए सिर्फ 10 हजार नये युवा प्रत्येक वर्ष इस अभियान से जुड़ें तो जमशेदपुर शहर में किसी को भी रिप्लेसमेंट डोनेशन की आवश्यकता नहीं होगी। हर वर्ष इस शहर से 75 से 80 हजार युवा 12वीं की परीक्षा में शामिल होते हैं, और ये सब युवा 18 वर्ष के ही होते हैं, इसलिए युवाओं के लिए यह मुश्किल कार्य नहीं आईये अपने यौवन से किसी जीवन का भला करें, मानवता की लिए रक्तदान करें।
रेड क्रॉस सोसाईटी, पूर्वी सिंहभूम
2023-24 में 71 कैम्प और एसडीपी डोनेशन से 7576, 2024-25 में 63 कैम्प और एसडीपी ब्लड डोनेशन से 8130 और 2025-26 में 63 कैम्प और एसडीपी डोनेशन से 7184 यूनिट रक्तदान हुआ। यह सब स्वैच्छिक रक्तदान है जो रेड क्रॉस द्वारा जमशेदपुर ब्लड सेन्टर और ब्रह्मान्द ब्लड सेन्टर के सहयोग से किया गया है।
विश्व रक्तदाता दिवस की पूर्व संध्या पर 3 एसडीपी डोनेशन
जमशेदपुर, 13 जून। विश्व रक्तदाता दिवस से अधिक महत्व रक्तदाताओं ने जरूरतमंदों के जीवन बचाने को दिया, इसलिए 14 जून को आयोजित रक्तदान शिविर में रक्तदान करने के बजाय रेड क्रॉस सोसाईटी, पूर्वी सिंहभूम के एसडीपी डोनेशन प्रभारी प्रभुनाथ सिंह की देखरेख में जमशेदपुर ब्लड सेन्टर में टाटा स्टील कर्मी राजु कुमार ने 46वीं बार एसडीपी दिया, वहीं टाटा स्टील के ही दिनेश कुमार सिंह ने 28वां बार एसडीपी डोनेशन किया, वहीं टाटा स्टील कर्मी जोरावर सिंह गबरी ने चौथी बार एसडीपी डोनेशन किया। सभी रक्तदाताओं को समर्पण को सम्मान देने के लिए रेड क्रॉस के एसडीपी डोनेशन प्रभारी प्रभुनाथ सिंह ने उपस्थित रहकर उनका हौसला बढाया साथ ही सभी रक्तदाताओं को सम्मान स्वरूप स्मृति चिन्ह प्रदान किया।



