



Ranchi. झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार ने सोमवार को विपक्षी दल भाजपा पर राजनीतिक लाभ के लिए छात्रों के आंदोलन को “हाईजैक” करने और प्रदर्शनकारियों को गुमराह करने का आरोप लगाया।विधानसभा में ‘शून्य काल’ के दौरान छात्रों के प्रदर्शन पर एक सवाल का जवाब देते हुए राज्य के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री कुमार ने कहा कि छात्र शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने इस छात्र आंदोलन को ‘हाईजैक’ (कब्जा) कर लिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की हिंसा के लिए भाजपा के अराजक तत्व” जिम्मेदार होंगे।
प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ सरकार की बातचीत के संबंध में निरसा से विधायक अरूप चटर्जी द्वारा पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा, “सरकार ने छात्रों के मुद्दों को सुलझाने के लिए हर संभव प्रयास किया। आंदोलनकारी छात्र सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार कर लेते, लेकिन भाजपा ने इस प्रदर्शन को हाईजैक कर लिया और उन्हें आज के आंदोलन के लिए भड़काया। कुमार ने बताया कि यह आंदोलन 14वीं जेपीएससी (झारखंड लोक सेवा आयोग) की प्रारंभिक परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के आरोपों से शुरू हुआ था। अनियमितता के संकेत मिलने के बाद सरकार ने अपराध जांच विभाग (सीआईडी) से जांच कराने के आदेश दिए, जिसके बाद जेपीएससी अध्यक्ष ने इस्तीफा दे दिया और 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कहा कि इस जांच में मदद के लिए डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य भी जब्त किए गए हैं।
मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर छात्रों से बातचीत करने और उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाई गई। इस समिति में सुदिव्य कुमार के अलावा दीपिका पांडेय सिंह, संजय प्रसाद यादव और चमरा लिंडा शामिल थे।
कुमार के अनुसार, छात्रों की मुख्य मांगों में अनियमितताओं की जांच, परीक्षाएं रद्द करना तथा जेपीएससी और जेएसएससी (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग) की कार्यप्रणाली में सुधार शामिल था। जांच के विषय में उन्होंने कहा कि आपराधिक साजिश की जांच सीआईडी द्वारा जारी रहेगी।
इसके अलावा वित्तीय अनियमितताओं के साक्ष्य मिलने पर सरकार ने स्वयं ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) से जांच कराने पर सहमति व्यक्त की है।
परीक्षाओं को रद्द करने की मांग पर मंत्री ने बताया कि सरकार 14वीं जेपीएससी परीक्षा और 2023 व 2025 की पिछली बची हुई परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमत हो गई है। छात्र आउटसोर्सिंग एजेंसी ‘टीडीपीएल’ (टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड) के माध्यम से आयोजित परीक्षाओं को भी रद्द करने की मांग कर रहे थे।
इस पर कुमार ने स्पष्ट किया कि जिन परीक्षाओं के परिणाम घोषित हो चुके हैं और अभ्यर्थियों की नियुक्ति की जा चुकी है, उन्हें रद्द नहीं किया जा सकता। हालांकि, यदि टीडीपीएल द्वारा आयोजित परीक्षाओं में बड़ी गड़बड़ियां पाई जाती हैं, तो कड़ा कदम उठाया जाएगा।
जेएसएससी-सीजीएल (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग- संयुक्त स्नातक स्तरीय) परीक्षा को रद्द करने की मांग पर उन्होंने कहा कि यह परीक्षा अदालत की निगरानी में आयोजित की गई थी, इसलिए सरकार के पास इसे रद्द करने का अधिकार नहीं है। सरकार ने इस परीक्षा में कथित अनियमितताओं की सीआईडी जांच की निगरानी के लिए उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति बनाने का प्रस्ताव रखा था, जिसे छात्रों ने स्वीकार नहीं किया।
कुमार ने यह भी जानकारी दी कि सरकार जेपीएससी और जेएसएससी की एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) में सुधार के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (भारतीय खनि विद्यापीठ) (आईआईटी-आईएसएम), धनबाद, भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम), रांची और एक्सएलआरआई जमशेदपुर के विशेषज्ञों के सुझावों को शामिल करने पर सहमत हुई है।
मंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा ने राजनीतिक लाभ के लिए इस प्रक्रिया को रोकने का प्रयास किया और छात्रों को 10 अगस्त के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए भड़काया। उन्होंने कहा, “यह दुखद है कि रांची की सड़कों पर चल रहा आंदोलन अब छात्रों का न रहकर भाजपा के राजनीतिक एजेंडे से प्रभावित हो गया है।”
मंत्री ने उम्मीद जताई कि छात्र अपना प्रदर्शन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रखेंगे। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आंदोलन के दौरान कोई हिंसा होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई करेगी।इस बीच, विधानसभा की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

