


Purnia. बिहार के पूर्णिया जिले में जादू-टोना करने के संदेह में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की कथित तौर पर हत्या कर दी गई और उनके शवों को जला दिया गया. पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी. पूर्णिया के पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) प्रमोद कुमार मंडल ने बताया, शुरुआती जांच से पता चलता है कि टेटमा गांव में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की पहले जादू-टोना करने के शक में हत्या की गई. ऐसा लगता है कि आरोपियों ने फिर उनके शवों को झाड़ियों में जला दिया. घटना रविवार रात की है. पुलिस ने शव बरामद कर लिए हैं और मामले की जांच कर रही है. मृतकों में कातो देवी, उनके बेटा-बहू बाबूलाल उरांव व सीता देवी, पोता मनजीत कुमार और उसकी पत्नी रानी देवी शामिल हैं. मृतकों के घर से दो किमी दूर दरगाह घेसरिया बहियार के जलकुंभी से भरे चापाकल से पांचों के शव बरामद किये गये. घटना के पीछे डायन और झाड़-फूंक की बात सामने आ रही है. पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है. बताया जा रहा है कि परिवार के एक किशोर, मृतक बाबूलाल उरांव के छोटे बेटे 14 वर्षीय सोनू ने घटना होते देखा. वह भागकर किसी तरह अपनी नानी के घर पहुंचा और सभी को घटना की जानकारी दी. पूर्णिया की एसपी स्वीटी सहरावत, एएसपी आलोक रंजन, एसडीपीओ पंकज कुमार शर्मा समेत वरीय पदाधिकारियों ने घटनास्थल की जांच की. पूर्णिया सदर के एसडीपीओ पंकज कुमार शर्मा ने बताया कि रविवार की रात एक ही परिवार के पांच लोगों की जलाकर हत्या कर दी गयी. पांचों के शव बरामद कर लिये गये हैं. इस मामले में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है.
यह है मामला
टेटगामा आदिवासी टोला में हाल के दिनों में तीन बच्चों की अचानक मौत हो गयी थी. मृत बच्चों में एक बच्चा बस्ती के रामदेव उरांव का था, जबकि रामदेव उरांव का ही एक बच्चा बीमार चल रहा था. इसी को लेकर बस्ती के लोगों को अंधविश्वास कायम हो गया कि मृतक परिवार ही डायन, झाड़-फूंक करा उनके बच्चों की जान ले रहा है. इसी अंधविश्वास में इस घटना को अंजाम दिया गया.
– तड़प-तड़प कर सभी की जान गयी
दरिंदगी की हद पार करते हुए पहले मृतकों के साथ बेरहमी से मारपीट की गयी. उसके बाद उनके बदन पर पेट्रोल छिड़क दिया गया. फिर घर के पास ही मकई की पराली जलाकर उसमें पांचों को जिंदा फेंक दिया गया. तड़प-तड़प कर सभी की जान चली गयी.
–पूरे गांव ने चुप्पी साध ली.
पूर्णिया जिले में घटी दिल दहला देने वाली घटना की जानकारी अगर मासूम बच्चा पुलिस को न देता तो शायद इस हैवानियत का खुलासा कई दिन बाद होता. जिस गांव में एक ही परिवार के 5 लोगों को जिंदा जलाकर मौत के घाट उतार दिया गया. और फिर बोरे में शवों को भरकर तालाब में फेंक दिया गया. उस घटना पर पूरे गांव ने चुप्पी साध ली. घटना के बाद पूरा गांव खाली हो गया। पुलिस को भी घटना की जानकारी करीब 10 घंटे बाद मिली.



