


धनबाद रेलवे स्टेशन पर सोमवार को एक बेहद जरूरी और जागरूक नजारा देखने को मिला। सफर के दौरान अचानक किसी यात्री को हार्ट अटैक आ जाए या कोई बेहोश हो जाए, तो डॉक्टर के आने से पहले उसकी जान कैसे बचाई जाए? इस बेहद संवेदनशील विषय पर धनबाद रेल मंडल और एक स्वयंसेवी संस्था (NGO) ने स्टेशन परिसर में ‘रेल सुरक्षा एवं जागरूकता महा-अभियान’ चलाया। इसमें यात्रियों को केवल लेक्चर नहीं दिया गया, बल्कि विशेषज्ञों ने ‘लाइव डेमो’ देकर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी।
एक्सपर्ट्स ने सिखाया- ‘आपातकाल में कैसे दें CPR’
ट्रेन के सफर या भीड़भाड़ वाले प्लेटफॉर्म पर अक्सर कार्डियक अरेस्ट के मामले सामने आते हैं। मेडिकल साइंस कहता है कि शुरुआती ‘गोल्डन आवर्स’ में मरीज को CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) मिल जाए, तो उसकी जान बचने के चांस 70% तक बढ़ जाते हैं। कार्यक्रम में मौजूद चिकित्सा विशेषज्ञों ने डमी के जरिए रेल कर्मचारियों और वहां से गुजर रहे आम यात्रियों को छाती पर दबाव देने (CPR) का सही तरीका और फर्स्ट-एड (प्राथमिक उपचार) की बारीक तकनीकें सिखाईं।
स्कूली बच्चों के ‘नुक्कड़ नाटक’ ने दिया कड़ा संदेश
इस जागरूकता अभियान का दूसरा सबसे बड़ा आकर्षण स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत किया गया ‘नुक्कड़ नाटक’ रहा। बच्चों ने अपने शानदार अभिनय से प्लेटफॉर्म पर मौजूद सैकड़ों यात्रियों को रोक लिया। नाटक के जरिए बच्चों ने संदेश दिया कि रेलवे की संपत्ति किसी सरकार की नहीं, बल्कि हम टैक्सपेयर्स की है। उन्होंने प्लेटफॉर्म पर गंदगी फैलाने वालों, बिना टिकट यात्रा करने वालों और चलती ट्रेन में स्टंट दिखाने वाली प्रवृत्तियों पर कड़ा व्यंग्य किया, जिस पर यात्रियों ने खूब तालियां बजाईं।
यात्री सुरक्षा और अनुशासन पर रहा खास फोकस
मौके पर मौजूद धनबाद रेल मंडल के वरीय मंडल वाणिज्य प्रबंधक (Sr. DCM) मनीष सौरभ ने बताया कि रेलवे का अंतिम लक्ष्य सिर्फ ट्रेनें चलाना नहीं है, बल्कि हर यात्री को सुरक्षित घर पहुंचाना है। इस अभियान के तहत महिला सुरक्षा, अपने लगेज की खुद हिफाजत करने, हमेशा फुट ओवरब्रिज (FOB) का इस्तेमाल करने और प्लेटफॉर्म टिकट के नियमों के प्रति जागरूक किया गया।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि धनबाद रेल मंडल भविष्य में भी ऐसे ‘पब्लिक कनेक्ट’ प्रोग्राम चलाता रहेगा। इस मौके पर मंडल के अन्य वरीय अधिकारी, एनजीओ के प्रतिनिधि, आरपीएफ जवान और भारी संख्या में यात्री मौजूद रहे।



