


जमशेदपुर।
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) जमशेदपुर में सोमवार को “एनआईआरएफ/क्यूएस क्रम निर्धारण एवं एनआईटी जमशेदपुर की वैश्विक उत्कृष्टता की दिशा” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य संस्थान की राष्ट्रीय और वैश्विक शैक्षणिक रैंकिंग को सुदृढ़ करने के लिए एक प्रभावी और दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करना था।
कार्यशाला में संस्थान के वरिष्ठ पदाधिकारियों, शिक्षकों, शोधार्थियों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भाग लिया तथा उच्च शिक्षा, अनुसंधान और वैश्विक प्रतिस्पर्धा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की।
गुणवत्तापूर्ण शोध और डेटा-आधारित योजना पर दिया गया विशेष बल
कार्यक्रम के प्रारंभ में अनुसंधान एवं परामर्श के अधिष्ठाता प्रो. सतीश कुमार ने स्वागत भाषण देते हुए कार्यशाला के उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने संकाय सदस्यों, शोधार्थियों और विभिन्न विभागों से गुणवत्तापूर्ण शोध, वित्तपोषित परियोजनाओं, बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR), परामर्श कार्यों और डेटा-आधारित रणनीतिक योजना पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर संस्थान की स्थिति मजबूत करने के लिए शोध और नवाचार की संस्कृति को और सशक्त बनाना आवश्यक है।
NIT जमशेदपुर के पास वैश्विक पहचान बनाने की अपार संभावनाएं
एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने अपने संबोधन में संस्थान की वर्तमान उपलब्धियों और भविष्य की रणनीति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संस्थान के पास मजबूत शैक्षणिक आधार, अनुभवी संकाय सदस्य, प्रतिभाशाली विद्यार्थी तथा उद्योग जगत से जुड़ने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
उन्होंने बहुविषयी शोध, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, नवाचार आधारित पारिस्थितिकी तंत्र और उद्योग-संबद्ध परियोजनाओं को एनआईटी जमशेदपुर की वैश्विक उत्कृष्टता की दिशा में प्रमुख आधार बताया।
विशेषज्ञों ने साझा किए वैश्विक रैंकिंग और संस्थागत विकास के सुझाव
कार्यशाला में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने उच्च शिक्षा और वैश्विक रैंकिंग से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे।
सीएसआईआर-नीरी, नागपुर के प्रो. सुनील कुमार ने शोध गुणवत्ता, सतत विकास, पर्यावरणीय अनुसंधान और बहुविषयी शोध कार्यों के महत्व पर विस्तृत चर्चा की।
डॉ. कुमारस्वामी ने वैश्विक रैंकिंग रणनीतियों, संस्थागत तुलनात्मक मूल्यांकन, शैक्षणिक प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के विभिन्न आयामों पर मार्गदर्शन प्रदान किया।
वहीं, आईकेयर के उपाध्यक्ष डॉ. कार्तिक श्रीधर ने संस्थागत क्षमता निर्माण, अंतरराष्ट्रीयकरण और उच्च शिक्षा नेतृत्व से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला। श्री दयानिधि उर्मलिया ने ग्रामीण विकास, भारतीय ज्ञान प्रणाली, सामाजिक विस्तार और सामाजिक प्रभाव आधारित मूल्यांकन की आवश्यकता पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
विभागीय लक्ष्य निर्धारण और सामूहिक प्रयासों पर जोर
कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने विभागीय स्तर पर स्पष्ट लक्ष्य निर्धारण, शोध उपलब्धियों के व्यवस्थित दस्तावेजीकरण तथा संस्थागत विकास के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन के लिए सभी विभागों और हितधारकों के बीच समन्वित कार्य प्रणाली विकसित करना आवश्यक है।
शोध और वैश्विक पहचान को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
समापन अवसर पर निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने सभी विशेषज्ञों, आयोजकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कार्यशाला से प्राप्त सुझावों को संस्थान की भविष्य की रणनीति और विकास योजनाओं में शामिल किया जाएगा।
धन्यवाद ज्ञापन डॉ. तितास कुमार मुखोपाध्याय ने प्रस्तुत किया। यह कार्यशाला एनआईटी जमशेदपुर की शोध, नवाचार, परामर्श, अकादमिक उत्कृष्टता और वैश्विक पहचान को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई।




