


जमशेदपुर।
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास का स्थापना दिवस आज को-ऑपरेटिव महाविद्यालय, जमशेदपुर में विभागीय स्तर पर उल्लासपूर्ण और विचारोत्तेजक वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर न्यास की स्थापना, उद्देश्य और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के साथ इसकी प्रासंगिकता को लेकर सार्थक संवाद हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. अमर सिंह ने की। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. कविता परमार, जिला परिषद सदस्य एवं विभाग संयोजिका, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, तथा डॉ. नवीन कुमार वेल्दुर्थी, सहायक प्राध्यापक, एन.आई.टी. जमशेदपुर, ने शिरकत की। मंच पर डॉ. ब्रजेश कुमार, डॉ. नीता सिन्हा और डॉ. अशोक कुमार रवानी की उपस्थिति रही।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई। प्राचार्य डॉ. अमर सिंह ने स्वागत भाषण में न्यास के कार्यों को विश्वविद्यालय से जोड़ने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
डॉ. कविता परमार ने अपने संबोधन में कहा, “समस्या नहीं समाधान पर चर्चा करना ही न्यास की परंपरा है।” उन्होंने न्यास की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि ‘शिक्षा बचाओ आंदोलन’ से लेकर वर्तमान तक की यात्रा की विस्तार से चर्चा की। साथ ही 11 प्रमुख विषयों में न्यास की गतिविधियों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति में न्यास की भूमिका को रेखांकित किया।
डॉ. नवीन कुमार वेल्दुर्थी ने पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित विचार रखे और एन.आई.टी. जमशेदपुर में 280 किलो प्लास्टिक निष्पादन जैसे उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थियों को सतत विकास और जिम्मेदार नागरिकता का संदेश दिया।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. प्रियंका सिंह, सहायक प्राध्यापक, हिंदी विभाग ने किया, जबकि डॉ. अशोक कुमार रवानी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर लगभग 100 विद्यार्थियों एवं महाविद्यालय के सभी शिक्षकों ने सक्रिय भागीदारी दिखाई। कार्यक्रम ने न केवल बौद्धिक समृद्धि प्रदान की, बल्कि सामाजिक चेतना को भी जागरूक किया। कार्यक्रम की सफलता में प्रो. अमरनाथ सिंह, वर्कर्स कॉलेज का विशेष सहयोग उल्लेखनीय रहा।




