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Jamshedpur News :शहर का सितारा मायानगरी के आसमान में चमका, परसुडीह के विश्वदीप ‘ज़ीस्त’ ने ऑस्कर विजेता संगीतकार ए आर रहमान जी के लिए चर्चित साइलेंट फिल्म “गांधी टॉक्स” में लिखा गीत

मुंबई / जमशेदपुर : महात्मा गांधी के सत्य-अहिंसा के संदेश दुनियाभर के सबसे प्रभावी सिद्धांतों में से एक है, वही भारतीय जनजीवन में गांधीजी इतने रचे बसे है, कि राष्ट्रपिता गांधी जी की तस्वीर हर भारतीय करेंसी पर छपी होती है। आर्थिक जरूरतें जहां इंसानों को क्या कुछ करने को मजबूर नहीं करती, वही अंत में सत्य की राह पर चलने वाले व्यक्ति और परिवार की ही जीत होती है। डायरेक्टर किशोर पांडुरंग बेलेकर निर्देशित साइलेंट फिल्म “गांधी टॉक्स” शहीद दिवस को भारत के सिनेमाघरों में रिलीज हुई, जो हमें अपने जीवन से जुड़े मानवीय मूल्यों के प्रति गहराई से सोचने को प्रेरित करती है। साइलेंट फिल्म “गांधी टॉक्स” में कोई संवाद नहीं है, वही समय-समय पर पृष्ठभूमि में चलने वाले भावनात्मक गीत दर्शकों को कहानी में स्वयं का जुड़ाव महसूस करवाते है। सिनेमा में संगीत ऑस्कर विजेता ए आर रहमान ने दिया है।

जमशेदपुर के विश्वदीप ‘ज़ीस्त’ को फिल्म में ऑस्कर विजेता संगीतकार ए आर रहमान जी के लिए गीत लिखने का मौका मिला हैं। फिल्म में विश्वदीप के द्वारा लिखी गई “निंदिया परी” समेत कुल तीन गीत शामिल हैं। जमशेदपुर के परसुडीह के गलियों में पले-बढ़े विश्वदीप ने करीम सिटी कॉलेज से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई कर अपने सपनों को पूरा करने 2013 में मायानगरी का रुख कर लिया था। बिना किसी गॉडफादर और बड़े संपर्क के विश्वदीप ‘ज़ीस्त’ ने एक दशक से ज्यादा समय तक मुंबई में लगातार संघर्ष किया। इस दौरान उन्होंने ख़ामोशी, वो भी दिन थे, दंगे और गांधी टॉक्स आदि फिल्मों में गीत लिखे और अब तक उनके लिखे 20 से ज्यादा फिल्मी और गैर फिल्मी गीत रिलीज हो चुके हैं। विश्वदीप बताते है कि ए. आर. रहमान के लिए काम करना, ऐसे सपने का सच होने जैसा है, जो उन्होंने देखने की भी हिम्मत नहीं की थी। गांधी टॉक्स में शामिल ‘निंदिया परी’ एक लोरी है, जिसे एक पिता अपनी बेटी के लिए गाते है, जिसे रहमान साहब ने पसंद किया और उसे फिल्म का हिस्सा बनाया। म्यूजिक लॉन्च के दौरान रहमान साहब से मिली शाबाशी ने उनके वर्षों के संघर्ष को सार्थक बना दिया है।

अपनी सफलता के बारे में बताते हुए विश्वदीप भावुक हो जाते है, और कहते है कि 2013 को जब वो गीतकार बनने का सपना लिए मुम्बई आने की योजना बना रहे थे, तब कई लोगों ने उन्हें हतोत्साहित किया, हौसला तोड़ा, लेकिन उन्हें अपनी प्रतिभा पर पूरा भरोसा था और इसी प्रतिभा और दृढ़ निश्चय के दम पर उन्होंने बॉलीवुड में अपने झंडे गाड़े। वर्षों के संघर्ष के बाद मिली यह खुशी अनमोल है। विश्वदीप बताते है कि संगीत और किताबें उनके घर की संस्कृति का अहम हिस्सा थे। बचपन में एक दिन जब उन्हें पता चला कि स्वर कोकिला लता मंगेशकर जी द्वारा गाया गया एक बंगाली गीत उनके पिता मनोज कांति सेन द्वारा लिखा गया है, जिसका क्रेडिट उन्हें कभी नहीं मिला, तो इस घटना ने भी उन्हें लेखन में आने को प्रेरित किया। लगभग 13 साल की उम्र में उन्होंने शायरी करनी शुरू कर दी, और वो सिलसिला निरंतर जारी रहा।

बहुचर्चित फिल्म ‘गांधी टॉक्स’ में शामिल ‘निंदिया परी’ गीत जमशेदपुर के विश्वदीप ‘ज़ीस्त’ की अब तक की सबसे बड़े उपलब्धि है। गीतकार के रूप में उनके फ़िल्मी सफर की शुरुआत साजिद अली की फिल्म ‘वो भी दिन थे’ से हुई, जिसमें उन्होंने जॉय बरुआ के संगीत निर्देशन में ‘मुझको मिली’ नामक गीत लिखा। इसके बाद उन्होंने समीर टंडन के साथ फिल्म ‘खामोशी’ के लिए शीर्षक गीत लिखा, जिसे श्रुति हासन ने अपनी आवाज दी थी. आगे चलकर उन्होंने बिजॉय नाम्बियार निर्देशित फ़िल्म ‘दंगे’ का गीत ‘ये पल हैं अपने’ भी लिखा। उनके लिखे गीतों को हरिहरन, अलका याग्निक, मोहित चौहान, पापोन, मोनाली ठाकुर, नीति मोहन, जोनिता गांधी, कुणाल गांजावाला, श्रुति हासन आदि दिग्गज गायकों ने भी अपनी आवाज़ दी है।

फिल्मों के साथ साथ विश्वदीप ज़ीस्त’ साहित्य की दुनिया में भी काफी सक्रिय हैं और मुम्बई, नवी मुम्बई, पुणे, सूरत, जमशेदपुर आदि शहरों के ढेरों कवि सम्मेलनों और मुशायरों में हिस्सा ले चुके हैं।

निंदिया परी ( Gandhi Talks ) : https://youtu.be/piGzL3bZGa4?si=QPqJN0awEtxWHbjJ

गांधी टॉक्स ( Full Album) : https://youtu.be/-PD0O7du_is?si=ggR-cAsCvd7iEoSk

विश्वदीप ‘ज़ीस्त’ ( Films & Non Film Songs ) : https://youtube.com/playlist?list=PLNPCAzpHVWpyEWt7ZB3EAbwMKZ2ih5KMQ&si=R0E7tUuRs4J6a5f4

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