जमशेदपुर – बागबेड़ा हाउसिंग कॉलोनी जलापूर्ति योजना की बदहाली से परेशान 20,000 की आबादी बीते 6 दिनों से बूंद-बूंद पानी को तरसती रही। मोटर खराब होने और विभागीय लापरवाही के चलते 1140 घरों में जल संकट बना रहा। अंततः जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद मंगलवार सुबह 7:30 बजे गंदे पानी की आपूर्ति शुरू की गई।
बागबेड़ा महानगर विकास समिति के अध्यक्ष सुबोध झा ने बताया कि योजना के तहत दो मोटरों की व्यवस्था थी, लेकिन स्पेयर मोटर तक गायब हो चुकी है। जो मोटर फिलहाल चालू की गई है, वह भी पुरानी है और बार-बार खराब हो रही है। फिल्टर प्लांट के निर्माण के लिए 1.88 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे, लेकिन योजना आज तक अधूरी है। विभाग झूठे आश्वासन और तारीखों के सहारे जनता को गुमराह कर रहा है।
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झा ने बताया कि योजना 26 जुलाई 2024 तक पूरी कर घर-घर शुद्ध जल आपूर्ति देने की थी, परंतु आज तक शुद्ध पानी उपलब्ध नहीं हो सका है। कभी मोटर जल जाती है, कभी पाइप फटती है – नतीजतन जनता गंदे पानी तक से वंचित रहती है।
17 जून को बागबेड़ा की इस गंभीर समस्या को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला उप विकास आयुक्त अनिकेत सचेत से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में मनोज सिंह, पवित्रा पांडे, विनोद राम, श्यामू मिश्रा, रामदुलारे चौबे, सुरेश प्रसाद, विक्की कुमार समेत कई ग्रामीण शामिल थे। उप विकास आयुक्त ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को त्वरित कार्रवाई का आदेश दिया, जिसके बाद मोटर की मरम्मत संभव हो सकी।
सुबोध झा ने सवाल उठाया कि यदि पंचायत इस योजना को संभाल नहीं पा रही है, तो उसे विभाग को हैंडओवर किया जाए ताकि सीधे जवाबदेही तय हो सके। वर्तमान स्थिति में विभाग और पंचायत एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टाल रहे हैं, और इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा की जनता को स्थायी समाधान चाहिए, न कि सिर्फ जब-जब पानी बंद हो, तब-तब “जुगाड़” से सप्लाई की शुरुआत।
