


Ranchi. झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सदन में विपक्ष, खासकर बीजेपी पर तीखा हमला बोला। अपने संबोधन की शुरुआत में ही उन्होंने बीजेपी विधायकों की अनुपस्थिति पर तंज कसते हुए कहा कि लोकतंत्र में जब सरकार का एक साल पूरा होने पर विपक्ष को आईना दिखाना चाहिए, तब वे सदन से नदारद हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि झारखंड 25 साल का हो चुका है और इसे अब कोई डरा या झुका नहीं सकता.सीएम केंद्र सरकार की नीतियों पर हमलावर रहे. उन्होंने शिक्षा और छात्रवृत्ति पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि केंद्र कटौती का नया रूप दिखा रहा है .
उन्होंने कहा कि गरीबों के अधिकार छीने जा रहे हैं पर संसद में वंदे मातरम पर बहस हो रही है, लेकिन इससे न गरीबी मिटेगी, न रोजगार सृजित होंगे. उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास मुद्दा ही नहीं है. “छात्रवृत्ति का मुद्दा उठाते हैं, जबकि केंद्र ने एसटी, एससी, ओबीसी और अल्पसंख्यकों की छात्रवृत्ति योजनाओं में 90 से 95 प्रतिशत तक कटौती की है. तकनीकी शिक्षण संस्थानों के अनुदान में 61 प्रतिशत कमी की है. ऐसे में विपक्ष को प्रश्न उठाने से पहले अपने गिरेबान में देखना चाहिए.
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की सुरक्षा बल में आदिवासी राज्यों का बड़ा योगदान है, लेकिन जंगल उजाड़कर व्यापारियों को लाभ पहुंचाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है. उन्होंने एयरपोर्टों पर अव्यवस्था, एयर शो में विमान दुर्घटना, कोविड वैक्सीनेशन के बाद बढ़ी बीमारियों, अहमदाबाद और गोवा की घटनाओं का जिक्र करते हुए केंद्र की जवाबदेही पर सवाल उठाये



