


New Delhi. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने एक रिपोर्ट में कहा है कि रेलवे के विभिन्न जोन मार्च 2023 तक 269 निजी साइडिंग मालिकों से 4087.33 करोड़ रुपये की बकाया राशि वसूलने में विफल रहे हैं. साइडिंग विस्तारित रेल पटरी होती है जो मुख्य रेलवे लाइन को सीधे कंपनी के परिसर से जोड़ती है और स्टेशनों पर माल ढुलाई की समस्या को खत्म करने में सहायक होती है.
रेलवे बोर्ड ने 2017 में सभी जोन को निर्देश दिया था कि वे निजी साइडिंग मालिकों से बकाया राशि की वसूली सुनिश्चित करें. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के अनुसार, साइडिंग तीन प्रकार की होती हैं – सार्वजनिक, निजी और सहायता प्राप्त. इनमें से निजी साइडिंग निजी पक्षों के स्वामित्व में हैं, और उनका निर्माण और रखरखाव रेलवे द्वारा शुल्क के आधार पर किया जाता है.
साइडिंग चालू करने से पहले रेलवे विभिन्न प्रकार के समझौते करता है, जैसे कि भूमि लाइसेंस समझौते और निजी साइडिंग समझौते.
कैग ने संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में कहा, ‘‘मार्च 2023 तक, भारतीय रेलवे में कुल 1,752 साइडिंग थीं, जिनमें से 1,007 साइडिंग (57.5 प्रतिशत) निजी थीं.’’



