


नई दिल्ली:
झारखंड में ग्रामीण विकास को और अधिक सशक्त बनाने और केंद्र एवं राज्य सरकार के बीच सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से मंगलवार को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में झारखंड सरकार की ग्रामीण विकास मंत्री श्रीमती दीपिका पांडेय सिंह, भारत सरकार के ग्रामीण विकास सचिव शैलेश कुमार सिंह और झारखंड सरकार के ग्रामीण विकास सचिव श्री के. श्रीनिवासन उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान श्रीमती दीपिका पांडेय सिंह ने स्पष्ट कहा कि झारखंड सरकार ग्रामीण सशक्तिकरण के प्रति पूर्णतः गंभीर है और हर पंचायत, गांव और जिले तक योजनाओं का लाभ पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने समावेशी विकास को राज्य की प्राथमिकता बताया और कहा कि इससे ग्रामीणों की आजीविका में सुधार होगा और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
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बैठक में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई:
🔹 लंबित केंद्रीय सहायता: झारखंड सरकार के हिस्से की कई योजनाओं की लंबित राशि अब तक जारी नहीं हुई है। बैठक में केंद्र से इस धनराशि को शीघ्र जारी करने की मांग की गई ताकि विकास कार्यों में रुकावट न आए।
🔹 योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन: विभिन्न ग्रामीण विकास योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), मनरेगा, और आजीविका मिशन को तेजी से लागू करने के उपायों पर चर्चा हुई।
🔹 रोजगार सृजन: ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी आजीविका और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने की रणनीति पर विशेष ध्यान दिया गया। कृषि आधारित उद्योग, कौशल प्रशिक्षण और महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
🔹 राज्य-केंद्र सहयोग: राज्य और केंद्र सरकारों के बीच बेहतर समन्वय के ज़रिए योजनाओं को समयबद्ध और पारदर्शी ढंग से लागू करने पर सहमति बनी।
बैठक के अंत में यह सहमति बनी कि दोनों स्तरों की सरकारें संवाद और साझेदारी के माध्यम से ग्रामीण भारत के सर्वांगीण विकास के लिए एक साझा रोडमैप तैयार करेंगी।



