




हेड कंसल्टेंट एवं एचओडी (J R & O), मेडिकल इंडोर सर्विसेज, टाटा मेन हॉस्पिटल
जमशेदपुर: हर वर्ष जुलाई माह को विश्वभर में सारकोमा अवेयरनेस मंथ (Sarcoma Awareness Month) के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य एक ऐसे दुर्लभ लेकिन महत्वपूर्ण कैंसर के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना है, जो अक्सर सामान्य गांठ या सूजन समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते इसकी पहचान हो जाए और मरीज को विशेषज्ञ केंद्र में उपचार मिले, तो उपचार के परिणाम काफी बेहतर हो सकते हैं।
सारकोमा शरीर के कनेक्टिव टिश्यू (संयोजी ऊतकों) जैसे मांसपेशियों, चर्बी, नसों, रक्त वाहिकाओं, रेशेदार ऊतकों और हड्डियों से उत्पन्न होने वाला कैंसर है। इसे मुख्य रूप से सॉफ्ट टिश्यू सारकोमा और बोन सारकोमा में बांटा जाता है। इसके 70 से अधिक उपप्रकार (सबटाइप) पाए जाते हैं, जिसके कारण इसका निदान अपेक्षाकृत जटिल हो सकता है।
सामान्य गांठ समझकर न करें नजरअंदाज
मान लीजिए हाथ या जांघ पर एक छोटी, बिना दर्द वाली गांठ दिखाई दे। अधिकांश मामलों में यह साधारण फैटी गांठ या चोट के कारण होने वाली सूजन होती है। लेकिन यदि वही गांठ लगातार बढ़ती जा रही हो, तो उसे चिकित्सक को अवश्य दिखाना चाहिए, क्योंकि दुर्लभ मामलों में वह सारकोमा भी हो सकती है।
भारत में हर साल हजारों नए मरीज
हालांकि वयस्कों में सभी कैंसरों का 1 प्रतिशत से भी कम हिस्सा सारकोमा का होता है, लेकिन बच्चों और किशोरों में यह 10–15 प्रतिशत कैंसर मामलों में पाया जाता है और युवाओं में भी यह अपेक्षाकृत अधिक देखा जाता है।
भारत में सॉफ्ट टिश्यू सारकोमा की अनुमानित दर प्रति एक लाख आबादी पर 1–2 मामले है। देश की विशाल जनसंख्या को देखते हुए हर वर्ष हजारों नए मरीज सामने आते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है, क्योंकि कई मामलों की रिपोर्टिंग नहीं हो पाती या मरीज देर से अस्पताल पहुंचते हैं।
किन लक्षणों को गंभीरता से लें?
हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:
- गांठ का लगातार बढ़ना
- आकार 5 सेंटीमीटर से अधिक होना
- त्वचा के नीचे गहराई में होना
- पहले हटाई गई गांठ का दोबारा उभरना
- गांठ के साथ दर्द होना
- लगातार हड्डी में दर्द या सूजन
- मामूली चोट के बाद हड्डी का टूट जाना
इन लक्षणों का अर्थ यह नहीं कि व्यक्ति को निश्चित रूप से सारकोमा है, लेकिन ऐसे मामलों में विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच कराना आवश्यक है।
सही निदान के लिए विशेषज्ञ टीम जरूरी
सारकोमा की पुष्टि के लिए एमआरआई, सीटी स्कैन और बायोप्सी की आवश्यकता होती है। चूंकि इसके कई प्रकार होते हैं, इसलिए अनुभवी पैथोलॉजिस्ट द्वारा जांच और कई मामलों में मॉलिक्यूलर टेस्टिंग भी महत्वपूर्ण होती है। बिना उचित योजना के संदिग्ध गांठ को हटाना आगे के उपचार को जटिल बना सकता है।
उपचार में आई है बड़ी प्रगति
पिछले दो दशकों में सारकोमा के उपचार में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। अब इलाज केवल ट्यूमर हटाने तक सीमित नहीं है। मरीजों का उपचार मल्टीडिसिप्लिनरी टीम द्वारा किया जाता है, जिसमें सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, ऑर्थोपेडिक ऑन्कोलॉजिस्ट, मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, रेडिएशन विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट, रिकंस्ट्रक्टिव सर्जन, फिजियोथेरेपिस्ट और रिहैबिलिटेशन विशेषज्ञ शामिल होते हैं।
अब हर मामले में अंग काटना जरूरी नहीं
पहले हाथ या पैर में सारकोमा होने पर अक्सर अंप्यूटेशन (अंग काटना) ही एकमात्र विकल्प माना जाता था। लेकिन आधुनिक इमेजिंग, सर्जरी, एंडोप्रोस्थेटिक रिकंस्ट्रक्शन, माइक्रोसर्जरी और सहायक उपचारों की मदद से अब कई मरीजों में लिंब-सेल्वेज सर्जरी संभव है, जिसमें ट्यूमर हटाकर अंग को सुरक्षित रखा जा सकता है और उसकी कार्यक्षमता भी काफी हद तक बनी रहती है।
व्यक्तिगत (पर्सनलाइज्ड) उपचार की दिशा में बढ़ता कदम
स्थानीयकृत सारकोमा में सर्जरी मुख्य उपचार है, जिसके साथ कई मामलों में रेडियोथेरेपी दी जाती है। कुछ बोन सारकोमा में सर्जरी से पहले और बाद में कीमोथेरेपी अत्यंत प्रभावी साबित होती है। हाल के वर्षों में मॉलिक्यूलर पैथोलॉजी के विकास ने कुछ विशेष प्रकार के सारकोमा में टार्गेटेड थेरेपी का रास्ता खोला है। साथ ही इम्यूनोथेरेपी और नई दवाओं पर भी लगातार शोध जारी है।
समय पर इलाज से बढ़ती है उम्मीद
विशेषज्ञों के अनुसार आज सारकोमा का निदान निराशा का पर्याय नहीं रहा। यदि रोग प्रारंभिक अवस्था में पकड़ में आ जाए, तो कई मरीज पूरी तरह सफलतापूर्वक उपचारित हो सकते हैं। उन्नत अवस्था के मरीज भी आधुनिक दवाओं, बेहतर सहायक देखभाल और विशेषज्ञ केंद्रों में उपलब्ध बहुविषयक उपचार से लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
विशेषज्ञ केंद्र में उपचार क्यों जरूरी?
चूंकि सारकोमा दुर्लभ और जटिल कैंसर है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देश भी सलाह देते हैं कि इसका उपचार विशेषज्ञ सारकोमा केंद्रों में कराया जाए। ऐसे केंद्रों में सटीक जांच, ट्यूमर बोर्ड, उन्नत सर्जरी, आधुनिक रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी, रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी, पुनर्वास और दीर्घकालिक फॉलो-अप जैसी सभी सुविधाएं उपलब्ध होती हैं।
संदेश स्पष्ट है
सारकोमा भले ही दुर्लभ हो, लेकिन इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। बढ़ती हुई गांठ, लगातार सूजन या बिना कारण हड्डी में दर्द होने पर तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। समय पर पहचान, सही निदान और आधुनिक बहुविषयक उपचार से आज सारकोमा के कई मरीजों के लिए बेहतर जीवन और बेहतर भविष्य संभव है।
जागरूकता ही पहली सीढ़ी है — और समय पर पहचान ही सबसे बड़ी उम्मीद।


