Jamshedpur : यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL) की तुरामडीह माइंस में ठेका कार्यों, कंपनी की सामग्री के कथित उपयोग तथा भूमिगत एवं सतही कार्यों से संबंधित शिकायतों ने कंपनी की कार्यप्रणाली, निगरानी व्यवस्था और खान सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं।
इन गंभीर जनहित के मुद्दों को वरिष्ठ भाजपा नेता सतीश सिंह द्वारा लगातार उठाया जा रहा है और उन्होंने संबंधित मामलों की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
भाजपा नेता सतीश सिंह का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराकर सच्चाई सामने लाना तथा UCIL की संपत्ति, पारदर्शिता और खान में कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इस प्रकार उन्होंने स्थानीय स्तर पर सामने आ रहे जनहित के मुद्दों को संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाकर जनसेवा की भूमिका निभाई है।
भूमिगत कार्य के नाम पर सतही कार्य कराने के आरोप
कुछ समय पूर्व लगभग ₹1.39 करोड़ के Work Order को लेकर सवाल उठाए गए थे। उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार 24 नवंबर 2025 को जारी Work Order No. GEMC-511687761339113 में “Deployment of manpower for miscellaneous civil work in underground at Turamdih Mines” का उल्लेख है तथा इसकी कुल राशि ₹1,39,70,190.19 बताई गई है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उक्त कार्यादेश के अंतर्गत निर्धारित भूमिगत कार्यों के बजाय सड़क, ग्रेडिंग, बैरिकेडिंग अथवा अन्य सतही कार्य कराए गए। यदि ऐसा हुआ है तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि कार्यादेश की शर्तों में कोई परिवर्तन किया गया था या नहीं, कार्य किसके निर्देश पर बदला गया तथा Measurement Book और भुगतान अभिलेखों में इसे किस रूप में दर्ज किया गया।
Rock Bolt के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि भूमिगत खदान में चट्टान एवं छत की सुरक्षा तथा सपोर्ट व्यवस्था में इस्तेमाल होने वाली Rock Bolt सामग्री का कथित तौर पर सड़क अथवा अन्य सतही निर्माण कार्यों में उपयोग किया गया।
यदि यह आरोप सही पाया जाता है तो मामला केवल कंपनी की सामग्री के उपयोग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खान सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण हो सकता है। इसलिए यह जांच आवश्यक है कि Rock Bolt किस उद्देश्य से जारी की गई, कितनी मात्रा में जारी हुई और उसका वास्तविक उपयोग किस स्थान पर किया गया।
इसके लिए Material Issue Register, Stock Register, Store Requisition, Site Records और Measurement Book का आपस में मिलान किया जाना आवश्यक है।
पिछले तीन वर्षों के कार्यों का विशेष ऑडिट कराने की मांग
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कथित तौर पर पिछले लगभग तीन वर्षों से समान प्रकृति के कार्यों में एक जैसा पैटर्न अपनाया जाता रहा है। सड़क निर्माण, ग्रेडिंग, बैरिकेडिंग, शेड तथा अन्य सिविल कार्यों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
ऐसे में जांच को केवल एक Work Order तक सीमित न रखते हुए पिछले कम-से-कम तीन वर्षों के संबंधित कार्यादेशों का विशेष ऑडिट कराने की मांग की गई है। इसमें—
Work Order एवं BOQ
Measurement Book
RA Bill एवं Final Bill
Stock एवं Material Issue Register
Store Requisition
Gate Pass
Muster Roll
Site Instructions
Contractor Payment Records
का मिलान किया जाना चाहिए।
ठेका व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल
शिकायतकर्ताओं ने ठेका व्यवस्था में कथित पक्षपात को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि समान प्रकृति के कार्यों में बार-बार किन ठेकेदारों को काम मिला, निविदा प्रक्रिया में कितने संवेदकों ने भाग लिया और कार्य आवंटन एवं भुगतान की प्रक्रिया किस प्रकार हुई—इन सभी पहलुओं की जांच आवश्यक है।
यदि कंपनी की सामग्री किसी ठेका कार्य में इस्तेमाल हुई है तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि उस सामग्री की लागत ठेकेदार के भुगतान में शामिल थी या नहीं। इससे संभावित वित्तीय अनियमितता की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
खान प्रबंधन की भूमिका की स्वतंत्र जांच की मांग
शिकायतों में तुरामडीह खान प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की भी स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। विशेष रूप से खान प्रबंधक मनोज कुमार मिश्रा की भूमिका को लेकर आरोप लगाए गए हैं।
हालांकि, इन आरोपों की सत्यता की पुष्टि सक्षम जांच एजेंसी द्वारा ही की जा सकती है। इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय संबंधित अधिकारियों की भूमिका, कार्यादेश, निरीक्षण, माप, सामग्री निर्गमन और भुगतान अनुमोदन की पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच की आवश्यकता बताई गई है।
लंबे समय से एक ही यूनिट में पदस्थापना की भी जांच हो
शिकायतकर्ताओं ने संबंधित अधिकारी की लंबे समय से तुरामडीह इकाई में पदस्थापना को लेकर भी सवाल उठाए हैं। इस संबंध में उनकी Posting और Transfer History की जांच की मांग की गई है।
जांच एजेंसी यह देख सकती है कि पिछले वर्षों में स्थानांतरण संबंधी आदेश जारी हुए थे या नहीं तथा यदि कोई आदेश जारी हुआ तो उसमें बाद में कोई संशोधन अथवा परिवर्तन किस आधार पर किया गया।
कथित ‘सिंडिकेट’ के आरोप की भी निष्पक्ष जांच हो
शिकायत में कुछ ठेकेदारों, कर्मचारियों एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों के बीच कथित सांठगांठ अथवा “सिंडिकेट” जैसे आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों को सत्य मानने के बजाय शिकायतकर्ताओं ने इसकी स्वतंत्र जांच की मांग की है।
इसके लिए ठेका आवंटन, कर्मचारी एवं सुपरवाइजर तैनाती, Measurement Book में हस्ताक्षर, सामग्री निर्गमन, बिल सत्यापन और भुगतान अनुमोदन की पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड-आधारित परीक्षण किया जाना चाहिए।
मामला वित्तीय पारदर्शिता के साथ खान सुरक्षा से भी जुड़ा
तुरामडीह एक भूमिगत यूरेनियम खदान है। ऐसे में भूमिगत सुरक्षा से जुड़ी सामग्री के उपयोग को केवल वित्तीय दृष्टि से नहीं देखा जा सकता। यदि Rock Bolt जैसी सामग्री के उपयोग को लेकर शिकायत सही पाई जाती है, तो इसका तकनीकी एवं सुरक्षा परीक्षण भी आवश्यक होगा।
इसलिए भाजपा नेता सतीश सिंह ने मांग की है कि मामले की जांच स्थानीय स्तर तक सीमित न रखकर UCIL के Vigilance/Corporate स्तर से स्वतंत्र जांच टीम के माध्यम से कराई जाए।
सतीश सिंह ने उठाया जनहित का मुद्दा
वरिष्ठ भाजपा नेता सतीश सिंह ने इन मामलों को लगातार उठाकर स्थानीय जनता और श्रमिकों से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों को सामने लाने का कार्य किया है। उनका कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम की संपत्ति की सुरक्षा, ठेका प्रक्रिया में पारदर्शिता और खदान में कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति का निजी मुद्दा नहीं, बल्कि व्यापक जनहित का विषय है।
उनके द्वारा लगातार इन मुद्दों को उठाए जाने का उद्देश्य संबंधित विभाग एवं UCIL प्रबंधन का ध्यान आकर्षित कर रिकॉर्ड की जांच, स्थल सत्यापन और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित कराना है।
उच्चस्तरीय जांच की प्रमुख मांगें
सतीश सिंह एवं शिकायतकर्ताओं की ओर से मांग की गई है कि—
पिछले तीन वर्षों के संबंधित Work Orders का विशेष ऑडिट कराया जाए।
भूमिगत एवं सतही कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाए।
Rock Bolt सहित कंपनी की सामग्री के निर्गमन एवं वास्तविक उपयोग का मिलान किया जाए।
Work Order, BOQ, Measurement Book और Bills का ऑडिट कराया जाए।
ठेका आवंटन प्रक्रिया एवं बार-बार कार्य प्राप्त करने वाले ठेकेदारों की जांच की जाए।
संबंधित अधिकारियों की Posting/Transfer History की समीक्षा की जाए।
बिल बनाने से लेकर भुगतान स्वीकृति तक पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी तय की जाए।
खान सुरक्षा से जुड़े आरोपों की तकनीकी जांच कराई जाए।
जांच UCIL के Vigilance/Corporate स्तर की स्वतंत्र टीम से कराई जाए।
यदि लगाए गए आरोप गलत हैं तो संबंधित रिकॉर्ड और जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट हो सकती है। वहीं यदि किसी आरोप में तथ्य पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी निर्धारित कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।
सतीश सिंह ने कहा कि पारदर्शी जांच से ही सच्चाई सामने आएगी और UCIL की संपत्ति, ठेका व्यवस्था तथा तुरामडीह माइंस में कार्यरत श्रमिकों के हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।