


सरायकेला-खरसावां।
सरायकेला प्रखंड के बाराबाना गाँव निवासी श्री सतीश देवगम एक परिश्रमी किसान हैं, जो सीमित औपचारिक शिक्षा और पारंपरिक कृषि अनुभवों के साथ अपने परिवार के भरण-पोषण हेतु संघर्षरत थे। पारंपरिक कृषि पद्धतियों से प्राप्त उपज एवं आय अपर्याप्त होने के कारण उनकी आजीविका प्रभावित हो रही थी। बाजार तक उनकी पहुँच केवल स्थानीय स्तर तक सीमित थी और आधुनिक कृषि तकनीकों के ज्ञान के अभाव में उनके उत्पादन की गुणवत्ता तथा मात्रा प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो रही थी।
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बदलाव की शुरुआत:
अपनी परिस्थितियों में सुधार लाने के उद्देश्य से श्री सतीश देवगम ने आधुनिक कृषि की ओर रुख किया। उन्होंने ड्रैगन फ्रूट की खेती आरंभ की। कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण (ATMA) के सहयोग से उन्होंने मृदा परीक्षण, सॉयल हेल्थ कार्ड का उपयोग, कुशल सिंचाई विधियों का क्रियान्वयन तथा अद्यतन फसल प्रबंधन तकनीकों को अपनाया। इस नवाचारी दृष्टिकोण और अथक परिश्रम के परिणामस्वरूप उनकी फसल की उपज एवं गुणवत्ता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, जिससे उनकी आय में कई गुना बढ़ोतरी हुई। बढ़ी हुई आय के कारण श्री सतीश देवगम न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने में सफल हुए, बल्कि उन्होंने अपने बच्चों की शिक्षा और परिवार के स्वास्थ्य पर भी समुचित ध्यान केंद्रित किया। उनकी यह सफलता गाँव के अन्य किसानों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बनी है, जिसके परिणामस्वरूप अब कई किसान ड्रैगन फ्रूट की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
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मुख्य सीख एवं निष्कर्ष:
ज्ञान, तकनीक एवं मेहनत से सफलता की रह पर अग्रेसर किसान श्री सतीश देवगम की यह कहानी स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि यदि किसानों को समुचित मार्गदर्शन, तकनीकी सहायता और सीखने की प्रबल इच्छा शक्ति प्राप्त हो, तो वे किसी भी चुनौती का सफलतापूर्वक सामना कर सकते हैं।
कृषि में नवाचार की शक्ति: ड्रैगन फ्रूट जैसी नवाचारी फसलों की खेती ग्रामीण आजीविका को रूपांतरित करने तथा कृषि क्षेत्र को सतत विकास की दिशा में अग्रसर करने की असीमित क्षमता रखती है।
प्रेरणादायक परिवर्तन: श्री सतीश देवगम की यह यात्रा केवल एक व्यक्तिगत सफलता नहीं, अपितु संपूर्ण समुदाय के लिए एक सशक्त प्रेरणा का स्रोत बन गई है। श्री सतीश देवगम की यह सफलता कहानी न केवल उनके परिश्रम और दृढ़ता की साक्षी है, बल्कि यह भी स्थापित करती है कि आधुनिक कृषि तकनीक और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण भारत की तस्वीर को सकारात्मक रूप से बदला जा सकता है।




