


चांडिल:
झारखंड आंदोलन के जनक और पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन पर नारायण आईटीआई लुपुंगडीह, चांडिल में गहरी शोकभावना व्यक्त करते हुए एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संस्थान के संस्थापक डॉ. जटाशंकर पांडे, सभी शिक्षक और छात्रगण भावुक नजर आए।
डॉ. जटाशंकर पांडे ने शिबू सोरेन के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “शिबू सोरेन न सिर्फ झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री थे, बल्कि वे आदिवासी समाज की आत्मा और आवाज थे। उन्होंने पूरी जिंदगी झारखंड की पहचान और हक के लिए संघर्ष किया।”
डॉ. पांडे ने कहा कि दिशोम गुरु ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के माध्यम से लंबा राजनीतिक सफर तय किया और राज्य के गठन में निर्णायक भूमिका निभाई। वे राज्यसभा के सदस्य रहे, दुमका से कई बार सांसद चुने गए और तीन बार भारत सरकार में कोयला मंत्री के रूप में सेवाएं दीं।
उन्होंने यह भी कहा कि शिबू सोरेन का जीवन संघर्ष, सेवा और संकल्प की मिसाल है। उनका व्यक्तित्व आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा। उन्होंने हमेशा आदिवासी समाज, किसानों और मजदूरों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई।
इस मौके पर बड़ी संख्या में शिक्षक, कर्मचारी और छात्र मौजूद थे। मुख्य रूप से एडवोकेट निखिल कुमार, प्रकाश महतो, देवाशीष मंडल, कृष्णा महतो, शुभम साहू, गौरव महतो, निमाई मंडल, मोहन सिंह सहित अन्य शिक्षक और विद्यार्थियों ने भी श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
शोकसभा का माहौल बेहद भावुक था और सभी ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत नेता की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। नारायण आईटीआई के इस आयोजन को स्थानीय समाज ने एक सराहनीय पहल बताया।



