


Jamshedpur. भुइयांडीह को श्मशान घाट से मानगो तक जोड़ने वाले रास्ते को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई ने नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। सड़क चौड़ीकरण के लिए जिला प्रशासन और टाटा स्टील की संयुक्त टीम लगातार अभियान चला रही है. इस दौरान करीब 60 कच्चे-पक्के घर और दुकानों को ढहा दिया गया है, मकानों के ध्वस्तीकरण के बाद स्थानीय बस्तीवासियों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है. बिना पूर्व नोटिस के घरों को तोड़े जाने के विरोध में लोग अब सड़क पर उतर आए हैं। शुक्रवार रात बस्तीवासियों ने मशाल जुलूस निकालकर प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया था.
डीसी ऑफिस पहुंचकर यहां प्रदर्शन किया गया. शनिवार को विरोध और तेज हो गया, जब भुइयांडीह पूजा मैदान से जिला मुख्यालय तक एक विशाल प्रदर्शन रैली निकाली गई. रैली में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं, जिन्होंने हाथों में तख्तियां लेकर तत्काल पुनर्वास की मांग उठाई. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने संविधान दिवस जैसे महत्वपूर्ण मौके पर अचानक कार्रवाई कर संवेदनहीनता और मनमानी का परिचय दिया.लोगों का कहना है कि घर तोड़ने से पहले न कोई स्पष्ट सूचना दी गई और न ही पुनर्वास की कोई व्यवस्था की गई. उन्होंने राज्य सरकार से हस्तक्षेप की मांग करते हुए चेतावनी दी कि जब तक सभी प्रभावित परिवारों का उचित पुनर्वास नहीं होगा, आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा. दुलाल भुइयां ने प्रशासनिक कदम को अमानवीय बताते हुए आंदोलन को जारी रखने की बात कही.
सीएम से मिल चुकी हैं विधायिका पूर्णिमा साहू
विधायिका पूर्णिमा साहू ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी से मुलाकात कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर अस्थायी रोक लगाने और प्रभावित लोगों के पुनर्वास की मांग रखी है. राजनीतिक दलों की ओर से भी आवाजें उठने लगी हैं कि जब तक विस्थापितों के पुनर्वास की ठोस व्यवस्था नहीं होती, तब तक तोड़फोड़ बंद की जानी चाहिए. वहीं राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि भुइयांडीह क्षेत्र को अवैध रूप से बसाने में कभी पूर्व मंत्री दुलाल भुइयां की अहम भूमिका रही थी और अब राजनीतिक जमीन कमजोर पड़ने के बाद वे इस मुद्दे के सहारे खुद को पुनः स्थापित करने की कोशिश में जुट गए हैं.
पूरे प्रकरण ने प्रशासन कठघरे में
सड़क चौड़ीकरण की जरूरत और मानवीय संवेदनाओं के बीच इस पूरे प्रकरण ने प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है। एक ओर शहर विकास की मजबूरी है, तो दूसरी ओर सर्द रातों में खुले आसमान के नीचे डेरा डाले परिवार समस्या और राजनीति की यह जंग फिलहाल थमने का नाम नहीं ले रही.



