


Ranchi. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने परीक्षा प्रणाली को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने का संकल्प दोहराते हुए मंगलवार को कहा कि परीक्षा सुधारों को लेकर सरकार के अभियान के तहत छात्रों से अब तक 8,500 से अधिक सुझाव प्राप्त हुए हैं। सोरेन ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि परीक्षा सुधार की प्रक्रिया जनभागीदारी पर आधारित होगी और युवाओं के सपनों को साकार करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, हम वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह परीक्षा प्रणाली बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘छात्रों की बात, छात्रों के साथ’ अभियान के तहत अब तक 8,500 से अधिक युवाओं ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के संबंध में अपने महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए हैं।
उन्होंने कहा, ओएमआर शीट से लेकर परीक्षा कैलेंडर, स्कोरकार्ड, प्रश्नपत्र, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, तकनीक के बेहतर उपयोग और झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) सहित दोनों आयोगों में संवैधानिक ढांचे के भीतर आवश्यक सुधारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव हमें प्राप्त हुए हैं।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सुझाव झारखंड के लाखों युवाओं का भविष्य बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा, ये सुधार केवल राज्य सरकार का प्रयास नहीं होंगे, बल्कि झारखंड के मेरे युवा साथियों की जनभागीदारी से आगे बढ़ेंगे।’’ हेमंत सोरेन की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब झारखंड में कथित परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन मंगलवार को 18वें दिन भी जारी है।
भर्ती परीक्षा में ‘अनियमितताओं’ के विरोध में आंदोलन के 18वें दिन छात्रों ने निकाला ‘मौन जुलूस’
रांची. भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में ‘जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच’ की अगुवाई में छात्रों ने मंगलवार शाम यहां जयपाल सिंह स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक एक ‘मौन जुलूस’ निकाला। इस मुद्दे पर छात्रों का विरोध प्रदर्शन मंगलवार को 18वें दिन में प्रवेश कर गया और यह जुलूस उसी आंदोलन के हिस्से के रूप में आयोजित किया गया था। भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) के कामकाज में सुधार, कई परीक्षाओं को रद्द करने तथा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या राज्य के बाहर के उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के एक पैनल से स्वतंत्र जांच कराने की मांग को लेकर छात्र व अभ्यर्थी 25 जुलाई से आंदोलन कर रहे हैं।
अपनी मांगों को लेकर छह प्रदर्शनकारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर भी बैठे हैं, जिनमें से दो को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। रविवार को जेपीएससी-जेएसएससी मंच के तहत प्रदर्शनकारी छात्रों और झारखंड सरकार के बीच छठे दौर की वार्ता में कोई नतीजा नहीं निकल सका था। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर मामले को सुलझाने के प्रति गंभीर नहीं होने का आरोप लगाया है।

