


जमशेदपुर : जानी-मानी डेंटल सर्जन डॉ. ऋचा अंगिक ने ऐतिहासिक शहर आगरा में आयोजित एसोसिएशन ऑफ ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन्स ऑफ इंडिया (एओएमएसआई) के 27वें मिड-टर्म कॉन्फ्रेंस एवं 13वें पी.जी. कन्वेंशन (मिडकॉम्स 2025) में भाग लेकर संस्था और क्लिनिक का गौरव बढ़ाया.10 से 12 जुलाई 2025 तक चले इस तीन दिवसीय वैज्ञानिक महाकुंभ में देशभर से ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जन्स, प्राध्यापक, क्लिनिशियन, पीजी स्टूडेंट्स और प्रदर्शक शामिल हुए. एओएमएसआई द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम युवा सर्जनों को मार्गदर्शन देने और उन्हें सशक्त करने की एक सराहनीय पहल है.डॉ. ऋचा अंगिक ने जबड़े की बीमारियों (जॉ पैथोलॉजिज) और इम्प्लांट्स पर देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श कर इसे एक सम्मानजनक और सीखने वाला अनुभव बताया.
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देश व विदेश से आए विशेषज्ञों ने साझा की नई जानकारी
कन्वेंशन में देश और विदेश से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने ओरल और मैक्सिलोफेशियल सर्जरी से जुड़े विविध विषयों पर व्याख्यान दिया. डॉ. अत्रेय राजगोपाल ने कास्मेटिक सर्जरी में एआई के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला. डॉ.राजगोपाल ने कहा कि चेहरे पर कट, दाग होना, छोटी या तिरछी नाक, सपाट नाक तथा मोटे होठ तथा मुंहासो से चेहरा खराब होने पर सर्जरी के जरिए इसे व्यवस्थित करने की प्रक्रिया में एआई का इस्तेमाल बढ़ा है और युवाओं का रूझान भी इस ओर बढ़ा है. स्कॉटलैंड से आए डॉ. एंड्रयूू एडवर्ड ने कहा कि दुर्घटना या अन्य वजहों से चेहरा विकृत होने पर सर्जरी के जरिए चेहरे को वापस खूबसूरत बनाया जा सकता है. इसमें एआई का अहम योगदान होता है. डॉ. रामकृष्ण शेनॉय ने दुर्घटनाओं में जबड़े टूटने के मामले ज्यादा आ रहे हैं और कई बार तो मल्टीपल फ्रैक्चर भी होता है. लेकिन अब ऐसी तकनीक उपलब्ध है जिससे सर्जरी के जरिए जबड़े को दुरूस्त किया जा सकता है. सर्जरी के जरिए तो खर्राटों की बीमारी भी ठीक की जा रही है.
सामाजिक गतिविधियां भी आयोजित हुईं
ताजमहल के शहर आगरा में आयोजित यह सम्मेलन न केवल वैज्ञानिक बल्कि शैक्षणिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत सफल रहा. आगरा से मात्र 50 किलोमीटर दूर भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा स्थित है, और यह शहर एयरपोर्ट, हाई-स्पीड ट्रेनों एवं एक्सप्रेसवे के माध्यम से देश के हर कोने से भली-भांति जुड़ा हुआ है.इस आयोजन में ज्ञानवर्धक सत्रों के साथ-साथ कई यादगार सामाजिक गतिविधियांं भी आयोजित की गईं. आयोजकों ने इसे एक प्रेरणादायक अनुभव बताते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की निरंतरता की आशा व्यक्त की



