


जमशेदपुर: जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो ने झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार पर छात्रों, युवाओं और सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों के दमन का आरोप लगाया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राज्य में अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है।
सांसद विद्युत वरण महतो ने कहा कि अपने अधिकारों, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं और सुरक्षित भविष्य की मांग को लेकर आवाज उठाने वाले छात्रों एवं युवाओं के खिलाफ मुकदमे दर्ज करना और उन्हें प्रताड़ित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
छात्रों पर कार्रवाई को लेकर सरकार पर हमला
विद्युत महतो ने आरोप लगाया कि जब राज्य का युवा भ्रष्टाचार, नियुक्ति प्रक्रिया और अन्य मुद्दों को लेकर सरकार से सवाल करता है तथा अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरता है, तो उसे लाठियों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन और सरकार से सवाल पूछना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। यदि किसी आंदोलन के दौरान कानून का उल्लंघन होता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन छात्रों और युवाओं की आवाज दबाने के लिए मुकदमों का सहारा लेना उचित नहीं है।
सोशल मीडिया पर सवाल उठाने वालों की कार्रवाई पर चिंता
सांसद ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र की बुनियाद है और सरकार की आलोचना को अपराध के रूप में देखने की प्रवृत्ति लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि सरकार को युवाओं की समस्याओं को दबाने के बजाय उनके साथ संवाद स्थापित करना चाहिए। रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं, नियुक्तियों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार को गंभीरता से विचार कर समाधान निकालना चाहिए।
‘मुकदमों से युवाओं की आवाज नहीं दबेगी’
विद्युत वरण महतो ने हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि डराने-धमकाने या मुकदमों के जरिए युवाओं की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि झारखंड का युवा अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर जागरूक है और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाता रहेगा।
सांसद ने राज्य सरकार से लोकतांत्रिक मूल्यों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित करने की मांग की।

