


जमशेदपुर
आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन ने सोमवार को सिविल डिफेंस एयर रेड मॉक ड्रिल का सफल आयोजन किया। सीएच एरिया स्थित महारानी मेंशन को अभ्यास स्थल बनाया गया, जहां एयर रेड अलर्ट के बाद सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन का वास्तविक परिस्थितियों की तरह अभ्यास किया गया। इस दौरान जिला प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन सेवा, स्वास्थ्य विभाग, आपदा प्रबंधन और सिविल डिफेंस की टीमों ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान संचालित किया।
कंट्रोल रूम से उपायुक्त ने संभाली कमान
अपराह्न 4:00 बजे एयर रेड की सूचना मिलते ही जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त राजीव रंजन साकची थाना स्थित जिला कंट्रोल रूम पहुंचे। वहां से उन्होंने पूरे ऑपरेशन की मॉनिटरिंग की और विभिन्न विभागों के अधिकारियों से लगातार स्थिति की जानकारी लेते रहे। कंट्रोल रूम में सिटी एसपी ललित मीणा, धालभूम के अनुमंडल पदाधिकारी अर्नव मिश्रा, सिविल डिफेंस के नोडल पदाधिकारी तथा अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
अलर्ट मिलते ही सभी एजेंसियां हुईं सक्रिय
आपात स्थिति की सूचना के बाद जिला कंट्रोल रूम से अग्निशमन सेवा, पुलिस, यातायात पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग तथा अन्य संबंधित एजेंसियों को तत्काल अलर्ट जारी किया गया। इसके साथ ही सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर तय स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के अनुरूप कार्रवाई शुरू कर दी गई।
महारानी मेंशन में चला सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन
अपराह्न 4:05 बजे सायरन बजते ही सीएच एरिया स्थित महारानी मेंशन में राहत एवं बचाव अभियान शुरू हुआ। सिविल डिफेंस, अग्निशमन सेवा, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अन्य एजेंसियों की संयुक्त टीमों ने प्रभावित लोगों की खोज, सुरक्षित निकासी और प्राथमिक उपचार की प्रक्रिया का अभ्यास किया।
लगभग 4:13 बजे उपायुक्त, सिटी एसपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पहुंचे तथा पूरे अभियान का निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। करीब 25 मिनट तक चले इस अभ्यास के दौरान सभी घायल एवं प्रभावित लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया का सफल प्रदर्शन किया गया।
आपदा प्रबंधन क्षमता को मजबूत करने का उद्देश्य
उपायुक्त राजीव रंजन ने बताया कि इस मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, आपदा या युद्ध जैसी आपात परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का परीक्षण करना तथा उपलब्ध संसाधनों और व्यवस्थाओं का मूल्यांकन करना था। उन्होंने कहा कि ऐसे अभ्यास वास्तविक आपदा के समय त्वरित, समन्वित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।



