


जमशेदपुर।
पोटका के हाता-जादूगोड़ा मार्ग स्थित Rankini Temple परिसर के धुमकुड़िया भवन में भूमिज समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पोटका विधायक Sanjeev Sardar उपस्थित रहे।
पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था पर मंथन
बैठक में सिंहभूम, मानभूम, बराहभूम और धालभूम क्षेत्र से आए हातु सरदार, मुड़ा, नाया और डाकुआ समुदाय के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इस दौरान पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को मजबूत बनाने और उसकी भूमिका को पुनः स्थापित करने पर विस्तार से चर्चा हुई।
पेसा कानून के तहत अधिकारों की जानकारी
बैठक में PESA Act के तहत ग्रामसभा को मिले अधिकारों पर विशेष जोर दिया गया।
वक्ताओं ने बताया कि ग्रामसभा गांव की सर्वोच्च इकाई है, जो विकास योजनाओं और निर्णय प्रक्रिया में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करती है।
स्वशासन को मिली नई पहचान
चर्चा के दौरान बताया गया कि पहले झारखंड सरकार की अधिसूचना में भूमिज समाज की स्वशासन व्यवस्था को शामिल नहीं किया गया था।
लेकिन विधायक संजीव सरदार के प्रयासों से अब हातु सरदार, मुड़ा, नाया और डाकुआ प्रणाली को आधिकारिक मान्यता मिल चुकी है, जिससे उनकी भूमिका और मजबूत हुई है।
विधायक संजीव सरदार का संबोधन
विधायक Sanjeev Sardar ने कहा कि राज्य गठन के 25 वर्षों बाद पेसा नियमावली को मंजूरी मिलना आदिवासी स्वशासन की ऐतिहासिक उपलब्धि है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अब ग्रामसभा ही सबसे बड़ी ताकत होगी और उसकी अनुमति के बिना भूमि अधिग्रहण या विकास कार्य संभव नहीं होगा।
उन्होंने यह भी बताया कि ग्रामीण अब जल, जंगल, जमीन, लघु वन उपज और खनिज संसाधनों का प्रबंधन स्वयं कर सकेंगे, साथ ही स्थानीय विवादों का समाधान भी पारंपरिक तरीकों से किया जाएगा।
समाज से सक्रिय भागीदारी की अपील
विधायक ने सभी हातु सरदार, मुड़ा, नाया और डाकुआ से अपनी जिम्मेदारियों को निभाने और गांवों को सशक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
प्रमुख लोगों की उपस्थिति
बैठक में अभिषेक सरदार, कालीपद सरदार, सिडेश्वर सरदार, हरिश्चंद्र सिंह भूमिज, सुदर्शन भूमिज, सुबोध सरदार, शत्रुघ्न सरदार, रथु सिंह सरदार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।




