


रिजर्व बैंक की क्षेत्रीय निदेशक संग एमएसएमई के वित्तीय_बैंकिंग विषयों पर हुई विस्तृत चर्चा आदित्यपुर (का.प्र.): आदित्यपुर ऑटो क्लस्टर के सभागार में आज रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की क्षेत्रीय निदेशक रक्षा मिश्रा एवं एजीएम अरविन्द एक्का की उपस्थिति में एमएसएमई क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण वित्तीय एवं बैंकिंग विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई. बैठक में एशिया और लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधियों ने एमएसएमई क्षेत्र की व्यावहारिक समस्याओं और बैंकों से संबंधित विभिन्न मुद्दों को उनके समक्ष रखा.
क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी को पुनः प्रारंभ करने की मांग
बैठक में उपस्थित एमएसएमई प्रतिनिधियों ने तकनीकी उन्नयन एवं आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी को पुनः प्रारंभ करने की मांग रखी. प्रतिनिधियों का कहना था कि इस प्रकार की योजना एमएसएमई इकाइयों को आधुनिक तकनीक अपनाने तथा अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान कर सकती है. बैठक में प्री-क्लोजर चार्ज पर बैंकों द्वारा ऋण के समयपूर्व भुगतान पर लगाए जा रहे प्री-क्लोजर चार्ज का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया. क्षेत्रीय निदेशक रक्षा मिश्रा ने इस विषय पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि जहां नियमानुसार ऐसे शुल्क नहीं लिए जाने चाहिए, वहां इसकी समीक्षा की जाएगी तथा आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित बैंकों को आवश्यक दिशा निर्देश दिया जाएगा.
बैंकिंग शुल्क में एकरूपता की मांग
बैठक में प्रोसेसिंग चार्ज, इंस्पेक्शन चार्ज, इंश्योरेंस संबंधी शुल्क सहित विभिन्न बैंकिंग शुल्कों में अलग-अलग बैंकों द्वारा अपनाई जा रही व्यवस्था पर भी चर्चा हुई. उपस्थित एमएसएमई प्रतिनिधियों ने इन शुल्कों में पारदर्शिता एवं एकरूपता की मांग की. बैठक में कहा गया कि कैश क्रेडिट लिमिट के नवीनीकरण पर ली जाने वाली शुल्क के लिये अगर किसी कैश क्रेडिट खाते में कोई गंभीर डिस्क्रिपेंसी या अनियमितता नहीं है और खाता नियमित रूप से संचालित हो रहा है, तो प्रत्येक वर्ष नवीनीकरण के नाम पर शुल्क लगाने की व्यवस्था की समीक्षा होनी चाहिए. क्षेत्रीय निदेशक ने इस विषय को भी बैंकों के समक्ष रखने तथा आवश्यक चर्चा करने का आश्वासन दिया. वहीं, विदेशी
मुद्रा लेन-देन में पारदर्शिता के स्पष्ट अभाव पर
एमएसएमई प्रतिनिधियों ने फॉरेक्स ट्रांजैक्शंस के दौरान खरीद एवं बिक्री के समय लागू दरों, शुल्कों तथा अन्य संबंधित जानकारी को स्पष्ट एवं पारदर्शी रूप से उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि उद्यमियों को लेन-देन की वास्तविक लागत की जानकारी पहले से हो सके. बैठक में बताया गया कि बैंकों में जो व्यक्ति किसी दूसरे पक्ष के लोन लेने के लिये अपनी गारंटी देता है, अगर किसी ऋण खाते में गारंटर अपनी निर्धारित जिम्मेदारी के अनुरूप भुगतान कर देता है, तो ऐसी स्थिति में उसकी जिम्मेदारी स्वतः समाप्त हो जाती है. परन्तु बैंक उसको उसके गारंटी राशी के भुगतान के पश्चात भी एनओसी नहीं देते है. इसमें एनओसी देने की स्पष्ट सीमा तय होनी चाहिए तथा आवश्यक औपचारिकताओं के बाद उसे एनओसी देकर दायित्व से मुक्त करने की व्यवस्था पर विचार होना चाहिए. क्षेत्रीय निदेशक ने इस विषय पर भी सकारात्मक कार्रवाई करने का भरोसा जताया.
रिजर्व बैंक की क्षेत्रीय निदेशक ने किया ऑटो कलस्टर का निरिक्षण
तत्पश्चात रिजर्व बैंक की क्षेत्रीय निदेशक के द्वारा ऑटो क्लस्टर का निरीक्षण किया गया तथा वहां उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की. उन्होंने लेबोरेट्री, टूल रूम एवं क्लाउड क्लासरूम सहित अन्य सुविधाओं का अवलोकन किया और इनके संचालन एवं एमएसएमई क्षेत्र को उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं की सराहना की. उन्होंने एमएसएमई इकाइयों को ऑटो क्लस्टर की आधुनिक सुविधाओं से अधिक से अधिक जोड़ने पर विशेष बल दिया. उन्होंने एमएसएमई क्षेत्र के तकनीकी विकास, कौशल उन्नयन एवं वित्तीय जागरूकता के लिए सहयोग की आवश्यकता पर जोर देते हुए सकारात्मक सहयोग का भी आश्वासन दिया. इस अवसर पर ऑटो कलस्टर के प्रबन्ध निदेशक एस एन ठाकुर, एसिया के अध्यक्ष इंदर अग्रवाल, महासचिव प्रवीण गुटगुटिया, उपाध्यक्ष संतोख सिंह, सचिव अशोक गुप्ता, तापस साहू, मनोज गुटगुटिया, अनिल गुप्ता, दशरथ उपाध्याय, विश्वनाथ हाजरा, स्वपन मजूमदार, आशीष अग्रवाल, सुबोध सिंह, पवन देबूका आदि उपस्थित थे.


