जमशेदपुर/नई दिल्ली: सांसद विद्युत बरण महतो ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात कर धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना और चाकुलिया क्षेत्र के एलिफेंट कॉरिडोर से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की।

सांसद ने केंद्रीय मंत्री को ज्ञापन सौंपकर धालभूमगढ़ एयरपोर्ट की आवश्यकता और क्षेत्र के विकास में इसकी महत्ता से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि कुछ दस्तावेजों की कमी के कारण एयरपोर्ट से संबंधित प्रस्ताव राज्य सरकार को वापस भेजा गया था। प्रस्ताव वापस भेजे जाने के करीब 11 माह बीत जाने के बावजूद राज्य सरकार की ओर से आवश्यक दस्तावेज केंद्र को उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।

धालभूमगढ़ एयरपोर्ट की NOC प्रक्रिया में तेजी की मांग
सांसद विद्युत महतो ने बताया कि उन्होंने हाल के दिनों में डीएफओ और पीसीसीएफ से भी इस मामले को लेकर बातचीत की है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि यदि प्रस्ताव की जांच के दौरान किसी दस्तावेज या जानकारी की कमी पाई जाती है, तो प्रस्ताव को दोबारा वापस भेजने के बजाय सीधे झारखंड सरकार से संबंधित दस्तावेज या जानकारी मंगाई जाए।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने सांसद के सुझाव पर सहमति जताते हुए मामले में आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया।
बैठक के दौरान केंद्रीय वन महानिदेशक सुशील अवस्थी से भी एयरपोर्ट परियोजना को लेकर सकारात्मक और सार्थक चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया कि झारखंड सरकार से प्रस्ताव प्राप्त होते ही पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा NOC की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा किया जाएगा।
वन महानिदेशक सुशील अवस्थी ने बताया कि झारखंड के PCCF एटी मिश्रा राज्य सरकार की ओर से आवश्यक प्रस्ताव और दस्तावेज केंद्र सरकार को उपलब्ध कराएंगे। इसके बाद मंत्रालय द्वारा आवश्यक परीक्षण कर NOC प्रदान करने की प्रक्रिया को शीघ्र पूरा किया जाएगा।
एलिफेंट कॉरिडोर और मानव-हाथी संघर्ष पर भी चर्चा
बैठक में चाकुलिया क्षेत्र के एलिफेंट कॉरिडोर से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। वन महानिदेशक ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में हाथियों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जा रहा है।
मानव-हाथी संघर्ष की समस्या के स्थायी समाधान के लिए झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त अंतर्राज्यीय समन्वय बैठक जल्द आयोजित की जाएगी।
इस बैठक में चारों राज्यों के संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे और हाथी संरक्षण एवं मानव-हाथी संघर्ष की समस्या से निपटने के लिए समन्वित रणनीति तैयार की जाएगी।
जंगलों में अव्यवहारिक निर्माण पर सांसद ने जताई चिंता
सांसद विद्युत महतो ने कहा कि जंगलों को पार्क में बदलने की प्रवृत्ति चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि वनों में अव्यवहारिक पार्क, रिसोर्ट और गेस्टहाउस आदि बनाए जाने से हाथियों के प्राकृतिक आवागमन के रास्ते प्रभावित हो रहे हैं और मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
उन्होंने सुझाव दिया कि यदि वन विभाग को पार्क आदि का निर्माण करना है तो इसके लिए परती और टांड़ क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि जंगल और हाथियों के प्राकृतिक आवास को नुकसान न पहुंचे।
वन महानिदेशक सुशील अवस्थी ने सांसद को आश्वासन दिया कि इस प्रकार के मामलों पर आवश्यक रूप से ध्यान दिया जाएगा।
चार राज्यों के लिए करीब 500 करोड़ की योजना
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि चारों राज्यों में हाथी संरक्षण के लिए करीब 500 करोड़ रुपये की योजना तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जल्द एक बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें चारों राज्यों के संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
बैठक में हाथियों के संरक्षण, एलिफेंट कॉरिडोर की सुरक्षा और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए साझा रणनीति तैयार की जाएगी। इसका उद्देश्य समस्या का प्रभावी और दीर्घकालिक समाधान सुनिश्चित करना होगा।

