


जमशेदपुर: लौहनगरी जमशेदपुर स्थित सिंहभूम जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन (तुलसी भवन) के मुख्य सभागार में हिन्दी रचनाधर्मिता को बढ़ावा देने के एक महान उद्देश्य के साथ एकदिवसीय ‘युवा रचनाकार’ कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। रविवार को आयोजित इस साहित्यिक कार्यशाला में युवा पीढ़ी ने बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के अध्यक्ष सुभाष चन्द्र मुनका ने की। वहीं, मुख्य अतिथि के रूप में शहर के जाने-माने समाजसेवी और के.के. बिल्डर्स के प्रबंध निदेशक विकास सिंह उपस्थित रहे।
दीप प्रज्वलन और मधुर सरस्वती वंदना से हुई शुरुआत
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ उपस्थित अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके पश्चात उपासना सिन्हा ने अपनी मधुर आवाज में सस्वर सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर पूरे सभागार का वातावरण सकारात्मक और ऊर्जावान बना दिया। अतिथियों का स्वागत और कार्यक्रम का विषय प्रवेश तुलसी भवन के उपाध्यक्ष राम नन्दन प्रसाद ने बड़े ही प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इस पूरी कार्यशाला के मंच का सफल संचालन संयुक्त रूप से प्रसन्न वदन मेहता और डॉ. अजय कुमार ओझा ने किया।
तीन अलग-अलग सत्रों में विद्यार्थियों ने सीखे साहित्य व लेखन के गुर
युवा प्रतिभाओं को साहित्य की बारीकियां सिखाने के लिए इस पूरी कार्यशाला को तीन प्रमुख वैचारिक और व्यावहारिक सत्रों में बांटा गया था, ताकि बच्चों को विधाओं का स्पष्ट ज्ञान मिल सके:
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कथा सत्र: इस सत्र में डॉ. मुदिता चन्द्रा ने विद्यार्थियों को कहानी बुनाई और लेखन के विशेष गुर सिखाए। इस सत्र में समन्वय की भूमिका सुरेश चन्द्र झा ने निभाई।
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काव्य सत्र: पामेला घोष दत्ता ने कविता के छंद, रस और भाव जैसी बारीकियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस सत्र में ब्रजेन्द्र नाथ मिश्र समन्वयक रहे।
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संवाद और समाचार लेखन सत्र: तीसरे सत्र में अवतार सिंह ने संवाद, सम्प्रेषण और समाचार लेखन कौशल पर अपना महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया। इस सत्र का समन्वय वसंत जमशेदपुरी ने किया।
29 विद्यालयों के 238 बच्चों की दिखी उत्साहपूर्ण भागीदारी
इस साहित्यिक आयोजन में जमशेदपुर नगर के 29 विभिन्न विद्यालयों से कुल 238 छात्र-छात्राओं ने पूरे जोश और उत्साह के साथ भाग लिया। इन विद्यार्थियों के साथ उनके शिक्षक-शिक्षिकाएं और शहर के कई नामचीन साहित्यकार भी उपस्थित रहे। बच्चों ने हर सत्र में गहन रुचि दिखाई और अपनी रचनात्मक प्रतिभा को निखारा।
‘भजन जैमिंग’ और काव्य पाठ ने बांधा समां, प्रतिभागी हुए सम्मानित
कार्यशाला के बीच भोजनावकाश के दौरान एक बेहद अनूठा प्रयोग किया गया। ‘निनाद’ संस्था की संस्थापक पूनम महानंद के कुशल संचालन में ‘भजन जैमिंग’ की शानदार प्रस्तुति दी गई, जिसने पूरे माहौल को संगीतमय बना दिया। समापन सत्र के दौरान छात्र-छात्राओं ने अपनी ही रची हुई स्वरचित कविताओं का मंच से पाठ किया, जिसे सुनकर उपस्थित अतिथियों ने जमकर सराहना की। अंत में सभी प्रतिभागी बच्चों को प्रमाण पत्र बांटे गए और उनके साथ आए शिक्षकों को अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया।
शहर के दिग्गज साहित्यकारों का मिला सानिध्य
इस साहित्यिक कार्यशाला में शहर के कई प्रतिष्ठित कलमकारों की गरिमामयी उपस्थिति रही। इनमें डॉ. यमुना तिवारी ‘व्यथित’, अरुणा भूषण शास्त्री, वीणा पाण्डेय भारती, अशोक पाठक ‘स्नेही’, रीना सिन्हा, डॉ. अरुण कुमार शर्मा, मनीष सिंह वंदन, माधुरी मिश्रा और शैलेन्द्र पाण्डेय ‘शैल’ शामिल थे। अंत में संस्थान के सह सचिव प्रकाश मेहता ने सभी अतिथियों और बच्चों का आभार व्यक्त किया। उपस्थित लोगों ने माना कि यह कार्यशाला हिन्दी साहित्य के प्रति युवाओं में नई सृजनात्मकता जगाने में पूरी तरह सफल रही।




